बी.डो.ओ. ऑफिस के बाहर सैंकड़ों मनरेगा मजदूरों ने किया प्रदर्शन

भोरंज: सीटू से संबंधित सैंकड़ों मजदूरों ने बुधवार को खंड विकास अधिकारी भोरंज के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने वाले अधिकांश मनरेगा भवन निर्माण मजदूर थे। भोरंज ब्लाक की कई पंचायतों में मनरेगा व 14वें वित्तायोग तथा अन्य निर्माण कार्यों को ठेके के आधार पर करवाया जा रहा है और कई जगह जे.सी.बी. मशीनों का प्रयोग भी किया जा रहा है। मनरेगा मजदूरों को लिखित रूप से मनरेगा का काम मांगने पर पंचायत सचिवों द्वारा रसीद नहीं दी जाती है। मनरेगा कार्यों में असैस्मैंट के नाम पर मनरेगा मजदूरों को 40 से 100 रुपए तक दिहाड़ी दी जाती है।

राज्य सरकार उड़ा रही मनरेगा कानून की धज्जियां
मनरेगा मजदूरों को न्यूनतम से कम दिहाड़ी देना सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार बंधुआ मजदूरी मानी जाएगी। राज्य सरकार द्वारा मनरेगा कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बजट में कटौती कर दी और इस कारण भी मनरेगा में बजट की कमी के कारण कभी सीमैंट का पैसा नहीं आता तो कभी मैटीरियल का पैसा नहीं आता। हिमाचल प्रदेश के सांसद कभी भी केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा बजट में कटौती को लेकर संसद और संसद के बाहर आवाज नहीं उठाते।

15 दिन के अंदर मनरेगा में मिले काम
नेताओं ने खंड विकास अधिकारी को एक मांग पत्र सौंपा, जिसमें मांग की गई कि मनरेगा मजदूरों को पंचायतों में लिखित रूप से काम मांगने पर आवेदन की रसीद दी जाए और आवेदन के 15 दिन के अंदर मनरेगा में काम दिया जाए। मनरेगा 14वें वित्तायोग व अन्य कार्यों को ठेके के आधार पर न दिया जाए। स्थानीय मजदूरों को प्राथमिकता के आधार पर काम दिया जाए। पंचायत सचिवों को आदेश दिए जाएं कि मनरेगा मजदूरों द्वारा कल्याण बोर्ड में पंजीकृत फार्मों को सत्यापित करें।

ठेका प्रथा बंद नहीं की तो धरना देने पर होंगे मजबूर
उन्होंने कहा कि यदि पंचायतों में ठेका प्रथा बंद नहीं की गई तो सीटू के कार्यकर्ता बी.डी.ओ. के दफ्तर के बाहर धरना देने पर मजबूर होंगे। प्रदर्शनकारी मजदूरों को सीटू के राष्ट्रीय सचिव कश्मीर सिंह ठाकुर, अध्यक्ष प्रताप राणा, सचिव सुरेश राठौर, ब्लाक अध्यक्ष कश्मीर चंद्र भाटिया व ब्लाक सचिव मंजना वर्मा ने संबोधित किया।

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