ट्रंप के दोबारा जीतने की संभावना कितनी?

यदि आप अमरीकी राष्ट्रपति का चुनाव लड़ रहे हों तो किन मुद्दों के सहारे जीत की उम्मीद करेंगे : पहला सत्ता की शक्ति, एक अच्छी अर्थव्यवस्था और कम बेरोजगारी दर, बढ़ता वेतन तथा पार्टी की मजबूती और अपनी पार्टी की ओर से जबरदस्त समर्थन अथवा पार्टी में अंतर्विरोध और पहचान का संकट तथा मतदाताओं को यह समझाने का काम कि अच्छी अर्थव्यवस्था के बावजूद विरोधी 4 साल पहले के मुकाबले बदतर हैं?

उक्त में से पहली स्थिति राष्ट्रपति ट्रम्प के हालात को बयां करती है जब वह  2020 के चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी स्थिति डैमोक्रेट्स की स्थिति को दर्शाती है जैसा कि अब तक हमने उनके बारे में देखा है। यही वे कारण हैं जिनके बलबूते -अपने कार्यालय की गरिमा घटाने, नस्लवाद को बढ़ावा देने, संविधान को सम्मान न देने तथा दुनिया को हम पर हंसने का मौका देने के बावजूद ट्रंप दोबारा चुने जाने के लिए अपने विरोधियों के मुकाबले अच्छी स्थिति में हैं।

गलती मत करना :ट्रंप एक कमजोर सत्तासीन व्यक्ति हैं। अच्छी अर्थव्यवस्था तथा कम बेरोजगारी दर के बावजूद राष्ट्रपति अधिकतर अमरीकियों में अलोकप्रिय हो चुके हैं। दो पोल्स ऑफ पोल्स में उनकी स्वीकार्यता दर क्रमश: 41.6 प्रतिशत तथा 42.8 प्रतिशत पाई गई है। ट्रंप समर्थकों का कहना है कि इन पोल्स का कोई मतलब नहीं है क्योंकि 26 महीने तक सत्ता में रहने के बाद पिछले कई राष्ट्रपति उनके मुकाबले अधिक अलोकप्रिय रहे हैं। उदाहरण के लिए ट्रंप जिमी कार्टर के मुकाबले 3 प्रतिशत प्वाइंट अधिक लोकप्रिय हैं। एक और राष्ट्रपति जो पोल्स में ट्रंप से निचले पायदान पर थे वह हैं रोनाल्ड रीगन। लेकिन यहां इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि उस समय बेरोजगारी दर 10.3 प्रतिशत थी जो आज 3.8 प्रतिशत है। ऐसे में दोनों की तुलना तर्कसंगत नहीं है। मेरा मानना है कि यदि ट्रंप साफ होते, इस पद के लिए ज्यादा उपयुक्त होते तो उनकी स्वीकार्यता दर अधिक होती। लेकिन हम जानते हैं कि ट्रंप न तो ऐसे हैं और न ही कभी होंगे।

वह, उनका स्टाफ और उनका परिवार कई स्कैंडलों में आकंठ डूबा हुआ है। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जिसने अपनी तीसरी पत्नी को धोखा दिया और फिर उसे पैसे का भुगतान किया। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जिसने पत्नी को पीटने के लिए व्यक्तियों को हायर किया जो अब जेल जाने की कगार पर हैं। और फिर निर्वाचक मंडल पर एक नजर डालने से पता चलता है कि वह बहुत अच्छी स्थिति में नहीं हैं। वर्जीनिया विश्वविद्यालय के सैंटर फॉर पॉलीटिक्स द्वारा क्रिस्टल बॉल के हवाले से यह बात सामने आ रही है। इसके अनुसार यदि ट्रंप उम्मीदवार बनते हैं उन्हें जीतने के लिए जरूरी 270 के मुकाबले 248 वोट मिल सकते हैं जबकि डैमोक्रेटिक उम्मीदवार को 244 वोट मिलने की संभावना है। यह 46 वोट का अंतर ही हार और जीत का निर्णय करेगा।

उधर डैमोक्रेट्स इस बात पर उलझे हुए हैं कि वह कितना वामपंथी हो सकते हैं। उनका झुकाव पूंजीवाद की बजाय  समाजवाद की तरफ अधिक है तथा वह सम्पत्ति का दोबारा बंटवारा करने की बात करते हैं। ये बड़े मामले हैं तथा इनमें जो भी गुण हों लेकिन इस बड़ी चर्चा के मुकाबले ट्रंप अपने विरोधियों के खिलाफ कुप्रचार में माहिर हैं। उन्होंने अपने विरोधियों को खतरनाक संविधान विरोधी चरमपंथी के तौर पर पारिभाषित कर दिया है जो देश को नष्ट कर देंगे। राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार तय करने के बाद डैमोक्रेट्स ट्रंप विरोधी गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश करेंगे परन्तु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि 2016 में जिन लोगों ने सैंडर्स का समर्थन किया था उन्होंने आखिर में ट्रंप को वोट डाला था।-पॉल बी

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