Kundli Tv- मनुस्मृति से जानें कैसे होती थी पुराने समय में शादी

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हिंदू धर्म में शादी को लेकर अनेकों मान्यताएं प्रचलित हैं। धार्मिक पुराणों और शास्त्रों में भी इसे लेकर बहुत सी रस्में बताई गई है। तो आइए हम आपको मनुस्मृति में बताए गए विवाह के 8 प्रकार बताते हैं। कहने का भाव है कि इन 8 तरीकों से विवाह हो सकता है। जिनमें से 3 प्रकार की शादी को अच्छा नहीं माना गया। कहा जाता है कि इनके बारे में भीष्म ने युधिष्ठिर को बताया था। यहां जानें इन 8 विवाहों के बारे में बता रहे हैं-
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ब्रह्म विवाह 
लड़का व लड़की के परिवार की सहमति से होने वाला विवाह ब्रह्म विवाह कहलाता है। वर्तमान समय में इसे अरेंज मैरिज कह सकते हैं।

दैव विवाह
किसी सेवा काम विशेष तौर पर धार्मिक अनुष्ठान के मूल्य के रूप में अपनी कन्या को दान में दे देना दैव विवाह कहलाता है।
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आर्श विवाह
लड़की वालों को गाय का दान करके विवाह करना आर्श विवाह कहलाता है। यह पहले ब्राह्मण परिवारों में होता था।

प्रजापत्य विवाह
लड़की से बिना पूछे उसका विवाह किसी संपन्न परिवार के वर से कर देना प्रजापत्य विवाह कहलाता है।
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गंधर्व विवाह
परिवार वालों की सहमति के बिना किया गया विवाह गंधर्व विवाह कहलाता है। इसे लव मैरिज कह सकते हैं।

असुर विवाह
लड़की को खरीदकर यानी पैसे, ज़मीन, गहने देकर विवाह करना असुर विवाह कहलाता है।

राक्षस विवाह
लड़की की सहमति के बिना उसका अपरहण करके जबरदस्ती विवाह कर लेना राक्षस विवाह कहलाता है।
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पैशाच विवाह
बेहोशी या लाचारी की अवस्था में लड़की से संबंध बनाना और बाद में उससे विवाह करना पैशाच विवाह कहलाता है।
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