कुंडली मिलान में हो गई है Mistake, शुक्रवार करें ये काम

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वैवाहिक जीवन सुखमय हो इसके लिए गुण मिलान किया जाता है और 18 से अधिक गुण प्राप्त होने पर विवाह की अनुमति दी जाती है परन्तु अधिक गुण मिलने पर भी कई दम्पतियों के वैवाहिक जीवन में असफलताएं देखी जाती हैं। अत: गुण मिलान के अतिरिक्त दोनों की कुंडली मिलान करके उनमें स्थित ग्रहों में तालमेल कैसा है इसका विचार करना भी आवश्यक है। भावी दम्पति के सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए आपसी वैचारिक तालमेल का होना आवश्यक है।

यह तालमेल कैसा रहेगा इसका अध्ययन जन्मकुंडली में स्थित ग्रह-योगों द्वारा किया जा सकता है। दोनों की जन्मकुंडली में अनुकूल ग्रह स्थितियां हों तो जीवन भर आशातीत सफलता मिलती है।

जन्म कुंडली का सप्तम भाव दाम्पत्य और पंचम भाव आपसी प्रेम से संबंधित है। चंद्रमा मन का कारक होने से आपसी तालमेल बनाने में सहायक होता है। दोनों के लग्नेश व राशि स्वामियों में मित्रता का होना दाम्पत्य जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दोनों की कुंडली में कुछ पारस्परिक ग्रह स्थितियां ऐसी होती हैं जिससे पता चलता है कि दोनों में कैसी निभेगी और वे जीवन में सफलता हासिल करेंगे या नहीं। सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए पंचम-सप्तम भाव, पंचमेश-सप्तमेश और लग्र-लग्नेश की जन्म कुंडली और नवमांश कुंडली में स्थिति, दोनों के राशि स्वामियों में मित्रता और इन्हें प्रभावित करने वाले अन्य ग्रहों की दृष्टि तथा युति के प्रभाव का विचार करके निर्णय लिया जाता है।

सुखद वैवाहिक जीवन के लिए हर शुक्रवार करें ये काम-
शुक्रवार को शुक्र का दान करें- (दान सामग्री: सफेद वस्त्र, सौंदर्य सामग्री, इत्र, चांदी, शक्कर, दूध-दही, चावल, घी, स्फटिक, सफेद पुष्प)

शुक्र के दिन ब्राह्मणों को सफेद मिष्ठान या खीर खिलाएं।

शुक्रवार को मंदिर में तुलसी का पौधा लगाएं।

प्रत्येक शुक्रवार चींटियों को आटा व पिसी शक्कर मिला कर डालें।

सफेद गाय को नित्य चारा व रोटी दें।

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