नसबंदी किए बंदरों को दोबारा पकड़ने पर बढ़ेगा मानदेय

शिमला (कुलदीप): बंदरों की संख्या पर नियंत्रण पाने के लिए राज्य सरकार नसबंदी की प्रक्रिया को तेज करेगी। इसके लिए बंदरों को पकड़ने के लिए सहारनपुर सहित अन्य स्थानों से आई टीमें शिमला पहुंच गई हैं। नसबंदी के लिए बंदरों को पकड़ने वाली टीम को राहत प्रदान करने के लिए सरकार ने पहले से नसबंदी किए बंदरों को दोबारा पकड़े जाने की स्थिति में मानदेय राशि बढ़ाने का निर्णय लिया है। मौजूदा समय में नसबंदी किए बंदरों के दोबारा पकड़े जाने की स्थिति में 150 रुपए प्रति बंदर का प्रावधान किया गया है। 

अब इस राशि को 150 रुपए प्रति बंदर से बढ़ाकर 400 रुपए करने का प्रस्ताव है। साथ ही नसबंदी किए गए बंदरों को रखने के लिए शिमला के टूटीकंडी में पहले ही एक पार्क बना है, जिसकी क्षमता 200 बंदरों को रखने की है। अब यहीं पर दूसरा पार्क बनाया जा रहा है जिसमें 200 अतिरिक्त बंदरों को रखा जा सकता है। सरकार की तरफ से बंदर पकड़ने वाली टीमों को यह भी हिदायत दी गई है कि गर्भवती मादा को पकड़ने की स्थिति में उसे पकड़कर अपने पास रखा जाएगा तथा बच्चा होने के बाद उसकी नसबंदी की जाएगी। उल्लेखनीय है कि राज्य में करीब 1,42,520 बंदरों की नसबंदी किए जाने की सूचना है। इस पर करीब 25 करोड़ रुपए खर्च आने की संभावना है। यानि 1 बंदर की नसबंदी पर करीब 2,000 रुपए खर्च आ रहा है। 

बंदरों की समस्या से निपटने की कोशिश जारी : कपूर
अतिरिक्त मुख्य सचिव वन तरुण कपूर ने संपर्क करने पर बताया कि राज्य सरकार द्वारा बंदरों के कारण उत्पन्न हो रही समस्या से निपटने की हर संभव कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए नसबंदी की प्रक्रिया जारी है और बंदरों को पकड़ा जा रहा है। बंदरों को समूहों में पकड़ने और रखने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वे आक्रामक न हों। इसी तरह पहले नसबंदी किए बंदरों को दोबारा पकड़े जाने की स्थिति में मानदेय राशि बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।

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