घर का सपना सच करेंगे सस्ते आवास, मिलेगा 15% अतिरिक्त FAR

नई दिल्ली(नवोदय टाइम्स): लैंड पूलिंग पॉलिसी में किफायती आवास भी 32 से चालीस मीटर तक के बनाए जा सकते हैं। जबकि इससे पूर्व किफायती आवास अथवा आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए डीडीए ने लगभग 26-28 मीटर तक के आवास बनाए थे, इसमें से अधिकतर अब भी नहीं बिके हैं। बताया जाता है कि ऐसे प्रोजेक्ट में जुडऩे वाले डेवलपरों को निर्धारित 200 एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) के अलावा पंद्रह प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर मिलेगा। यह सब-कुछ लैंड पूलिंग पॉलिसी के अंतर्गत होगा। इसमें आवासीय सुविधा के साथ-साथ करीब एक लाख से अधिक रोजगार सृजित भी किया जाएगा।

आवासीय फ्लैट योजना में शामिल की थी किफायती मकानों की बड़ी
दरअसल डीडीए ने पिछले दिनों अपनी आवासीय फ्लैट योजना में किफायती मकानों की बड़ी रेंज शामिल की थी। लेकिन इसमें अधिकांश मकान 32 वर्ग मीटर के दायरे में भी नहीं है। इसी कारण डीडीए की योजना फ्लॉप हो चुकी है। अब आने वाले दिनों में डीडीए ने भी नए निर्माण में मकानों के क्षेत्रफल को विस्तार देने की योजना बनाई है। साथ ही लैंड पूलिंग पॉलिसी में भी इसी योजना के तहत किफायती आवास तैयार किये जा सकते हैं। यह कार्य डेवलपरों को भी आवश्यक तौर पर करना होगा। इसके बदले में उन्हें पंद्रह प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर का लाभ मिलेगा। मौजूदा समय में ग्राउंड कवरेज के अनुपात में 150 एफएआर तक निर्माण किया जा सकता है, जो इस नीति में बढ़कर 200 एफएआर तक सामान्य स्थिति में शामिल होगा। जबकि किफायती मकान बनाने के लिए पंद्रह प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर का लाभ डेवलपरों को मिलने से संभावना है कि दिल्ली में मध्यम व निम्न आय वर्ग की जरूरत के अनुसार मकानों की कमी का संकट दूर हो सकेगा। डीडीए के अनुसार इस नीति में लगभग 22 लाख से अधिक मकान बनने की संभावना है। तकरीबन 80 लाख लोगों को इस नीति से लाभ मिलने की उम्मीद है। 

मिश्रित भू-उपयोग होगा
पॉलिसी में भूमि को विकसित करने की जिम्मेवारी डीडीए की होगी, लेकिन इसके बदले में वह सामुदायिक कार्यों के लिए कुल जमीन का कुछ हिस्सा अपने पास रखेगा। शेष विकसित भूमि प्रमोटर अथवा किसान या डेवलपर को लौटाई जाएगी। इसमें रिहायशी के साथ-साथ आर्थिक व कामर्शियल गतिविधियों के लिए भी व्यवस्था होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस पॉलिसी के कारण करीब एक लाख से अधिक रोजगार पैदा होंगे। इसमें स्कील्ड कर्मचारी व अधिकारी वर्ग के लिए भी रोजगार रहेंगे। 

35 हजार करोड़ रुपए अब नहीं फंसेंगे
दरअसल पॉलिसी भले ही शुक्रवार को स्वीकृत हुई है, लेकिन वर्ष 2015 में ही पहली बार पॉलिसी का ड्राफ्ट बनने और उस पर डीडीए की सहमति के बाद विभिन्न इलाकों में डेवलपर तथा उनके समूहों ने किसानों व बड़े जमींदारों से जमीन लेकर उस पर अपने प्रोजेक्ट बनाने आरंभ कर दिये। साथ ही लोगों से भी इसमें भारी मात्रा में निवेश कराया। खुद डेवलपरों के संगठन की ओर से इस संबंध में कहा गया कि यदि पॉलिसी पास नहीं होती तो करीब 35 हजार करोड़ रुपये इसमें फंस जाते। यह रुपये डेवलपर, प्रमोटर, किसानों व निवेशकों के अलावा साधारण वर्ग के उन लोगों के भी थे, जो सस्ते दर पर दिल्ली में आवास लेने की चाह रखते हैं। कुल 110 डेवलपर इस पॉलिसी के नाम पर पहले से ही अपने प्रोजेक्ट की घोषणा कर चुके हैं, जमीन भी खासी मात्रा में खरीद चुके हैं अथवा किसानों से समझौता कर चुके हैं। 

पॉलिसी धरातल पर होगी अगले वर्ष ही 
डीडीए से मुहर लगने के बाद भी अभी इस पॉलिसी का लाभ लेने और लोगों तक उसका फायदा पहुंचने में तीन से छह माह का समय लग सकता है। हालांकि डीडीए बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि जमीन को पॉलिसी में शामिल कराने वालों को चक्कर नहीं काटने होंगे और समयसीमा में उन्हें निर्माण की मंजूरी भी मिलेगी। फिलहाल स्वीकृत प्रस्ताव को केंद्रीय आवास मंत्रालय के समक्ष भेजा है, जहां औपचारिक मुहर लगने के बाद उसे अधिसूचित किया जाएगा। पॉलिसी अधिसूचित होने के बाद ही लागू हो सकेगी। इस प्रक्रिया में करीब एक से दो सप्ताह का समय कम से कम लगने की संभावना है। वैसे डीडीए अधिकारियों का मानना है कि सही तरह से पॉलिसी अगले वर्ष ही लागू हो पाएगी। 

जमीन पर विभिन्न निर्माण प्रोजेक्ट को कोई भी दे सकता है अंजाम
दरअसल लैंड पूलिंग पॉलिसी में कोई भी बड़ा किसान अथवा किसानों का समूह या जमींदार किसी भी डेवलपर के साथ मिलकर जमीन पर विभिन्न निर्माण प्रोजेक्ट को अंजाम दे सकता है। इसके लिए तय मानक के अनुरूप जमीन का हिस्सा डीडीए के पास रहेगा, शेष भूमि को विकसित करके प्लान सहित डीडीए निर्माण करने की इजाजत देगा। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के लिए सबसे पहले जमींदार द्वारा पेश किये जाने वाले दावे से जुड़े जमीन के दस्तावेजों की जांच होगी। डीडीए के अधिकारी का कहना है कि दस्तावेज की जांच के लिए दिल्ली सरकार जमीन के खसरा व अन्य दस्तावेजों के सत्यापन के काम को पूरा करेगी और उसका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। तभी इस योजना को आगे बढ़ाया जा सकता है। साथ ही पॉलिसी में अंतिम क्षणों में किसान अथवा प्रमोटरों को कुछ राहत भी दी गई है। इसलिए दिशा-निर्देशों में भी बदलाव हुए हैं। अधिकारी ने कहा कि पॉलिसी और दस्तावेजों के सत्यापन के अलावा प्रमोटर अपने निर्माण संबंधी प्रोजेक्ट के लिए डीडीए के समक्ष अनुमति मांगेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में तकरीबन छह से आठ माह तक का समय लग सकता है। 

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत
किराड़ी, सुलेमान नगर, मुंडका, नांगलोई जट, निलौठी, नीलवाल, बाजितपुर, ठकरान, नांगल ठकरान, बावाना, पूंठ खुर्द, सुल्तानपुर डबास, सालहपुर माजरा, बुद्धानपुर, काठेवाड़ा, जाटखोर, चांदपुर, लाडपुर, कान्झावला, कराला, मदनपुर डबास, मोहम्मदपुर माजरा, रानी खेड़ा, रसूलपुर, घेवरा, सावदा, दरियापुर कलान, खेड़ा खुर्द, अकबरपुर माजरा, भलसवा डेयरी, बुरारी, इब्राहिमपुर, झाड़ोदा माजरा, जैंदपुर, खादीपुर, कमलपुर माजरा, खमपुर, मोहम्मदपुर रमजानपुर, मुखेललपुर, नांगली पुना, सलीमपुर माजरा, टिगगीपुर, फतेहपुर जाट, समयपुर, लिबासपुर, सिरसपुर, बीजेपुर, अलीपुर, टिकरीखुर्द और गढ़ी खुसरो। 

दक्षिण दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत
 बक्करवाला, बपरोला, गोइला खुर्द, हास्ताल, कुतुबपुर, नंगली सकरावती, नवादा माजरा, शाफ ीपुर राणहौला, रजापुर खुर्द, ताजपुर खुर्द, तिलंगपुर कोटला, असलतपुर खुर्द, छावला, दिनापुर खुर्द, दौलतपुर, ढिचाऊं कलां, हसनपुर, दींदापुर, जफ रपुर कलां, जफ रपुर हिरण कुंड, झुलजिलुली, खारखरी जाटमल, खारखरी नाहर, खारखरी रौण्ड, खेरा डाबर, पांडवला कलान, पपरावत, पांडवला खुर्द, काजीपुर, रेवला खानपुर, करंगपुर, शेरपुर डेयरी, उज्वा और रोशन पुरा शामिल हैं।

 क्या  हैं नियम?

  • श्रेणी 1 और 2 हेक्टेयर से लेकर 20 हेक्टेयर से कम के लिए श्रेणी 2
  • श्रेणी 1 में (20 हेक्टेयर और उससे अधिक) 60 प्रतिशत भूमि विकास कर्ता संस्था (डी ई) को लौटाई जाएगी और 40 प्रतिशत भूमि  डीडीए के पास रहेगी।
  • श्रेणी 2 में (2 हेक्टेयर से लेकर 20 हेक्टेयर से कम ) 48 प्रतिशत भूमि विकास कर्ता संस्था (डी ई) को लौटाई  जाएगी और 52 प्रतिशत भूमि डीडीए रखेगा। 
  • श्रेणी 1 में भूमि उपयोग के संबंध में डी ई को लौटाई गई भूमि (60 प्रतिशत) में 53 प्रतिशत सकल रिहायशी, 2 प्रतिशत नगर स्तरीय सार्वजनिक और अद्र्ध सार्वजनिक सुविधाआें और 5 प्रतिशत नगर स्तर व्यावसायिक भूमि होगी । 
  • श्रेणी 2 में भूमि उपयोग के संबंध में शर्त पर डीई को लौटाई गई भूमि(48 प्रतिशत)का वितरण 43 प्रतिशत सकल आवासीय, 2 प्रतिशत नगर स्तरीय सार्वजनिक एवं अद्र्ध सार्वजनिक सुविधाएं और 3 प्रतिशत नगर स्तरीय व्यवसायिक भूमि होगी।


 

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