होलिका दहन: होली की धधकती आग में करें अपने सभी रोगों का The End

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होली का पर्व सामाजिक एकता का संदेश देने वाला पर्व है, जहां ऊंच-नीच के भेदभाव को छोड़कर व्यक्तिगत ईर्ष्या-द्वेष की भावना भुला कर लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं। वास्तव में यह पर्व राष्ट्रीय एकता को समर्पित है। हमें होली पर्व की भांति वर्ष के शेष दिनों में भी आपसी कड़वाहट भूल कर प्रेम, उत्साह तथा आनंद से जीवन व्यतीत करना चाहिए। इसी में देश तथा समाज का हित है। क्या आप जानते हैं ज्योतिष विद्वानों ने होलिका दहन को एक सिद्ध तिथि माना है। इस रात किए गए उपाय कभी खाली नहीं जाते। आप भी गंभीर रोगों से परेशान हैं तो होली की धधकती आग में कुछ उपाय करने से अच्छा स्वस्थ्य प्राप्त कर सकते हैं।

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गंभीर रोग यदि मैडीकल उपचार से भी ठीक नहीं हो रहा तो-देसी घी में भीगे दो लौंग, एक बताशा, मिश्री, एक पान का पत्ता होलिका दहन में अर्पित करें। दाएं हाथ में 4 गोमती चक्र लेकर रोग मुक्ति की प्रार्थना करें। गोमती चक्र रोगी की पलंग के चारों पायों में चांदी के तार से बांध दें।

यदि कोई बहुत बीमार है या दवा नहीं लग रही तो एक मुट्ठी पीली सरसों, एक लौंग, काले तिल ,एक छोटा टुकड़ा फिटकरी, एक सूखा नारियल लेकर उस पर 7 बार उल्टा घुमा कर होलिका में दहन कर दें।

गले, वाणी या त्वचा संबंधी रोगों के लिए हरी मूंग की एक मुट्ठी होलिका दहन में डालें।

खांसी, अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से 48 बादाम सात बार उलटा घुमा कर होलिका दहन में समर्पित करें। ये उपाय पुरानी से पुरानी खांसी में भी रामबाण जैसा प्रभाव देता है।

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