इन तीन देवताओं से है होली का गहरा संबंध !

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इतना तो सब जानते ही हैं कि होली का त्यौहार भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद से जुड़ा हुआ है। शास्त्रों के अनुसार, प्रह्लाद के पिता हिरणयकश्यप ने अपने पुत्र को मारने के लिए उसे अपने बहन की गोद में बिठाकर अग्नि में जलाना चाहा। परंतु विष्णु जी की कृपा से प्रह्लाद का बाल भी बांका नहीं हुआ था। लेकिन गलत भावों से प्रह्लाद को अपनी गोद में लेने वाली होलिक अग्नि में जलकर भस्म हो गई थी। इसी घटना के बाद होलिका दहन मनाया जाना शुरू हुआ था। लगभग सभी लोगों को इसके बारे में पता ही होगा लेकिन बहुत कम लोग होंगे जो जानते होंगे कि होली का संबंध न केवल प्रह्लाद और भगवान विष्णु से है बल्कि और भी कई देवी-देवताओं से है। तो आइए जानते हैं होली से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य जिनके बारे में आप नहीं जानते होंगे।


क्या है होली से भगवान शंकर का संबंध
धार्मिक और पौराणिक ग्रंथों की मानें तो होली का त्यौहार भगवान शंकर, कृष्ण और भगवान विष्णु से जुड़ा है। मान्यता है कि होली शिवरात्रि के 15 दिन बाद मनाई जाती है। एक पौराणिक कथा के मुताबिक कैलाश पर्वत के निवासी और सदैव वैराग में लीन रहने वाले शिवजी की साधना को कामदेव ने भंग करने और उनके अंदर काम वासना को जागृति करने का प्रयास किया था। जिससे क्रोधित हो कर उन्होंने यानि शिव जी ने कामदेव को अपने तीसरे नेत्र से भस्म कर दिया था। माना जाता है होली के एक दिन पहले होलिका जो जलती है इसी प्रसंग के बाद हुई थी।

होली से श्रीकृष्ण और राधा का संबंध
कहते हैं कामदेव को भस्म करने के बाद जब शिवजी का क्रोध शांत हुआ तो देवी पार्वती और कामदेव की पत्नी रति दोनों ने मिलकर ने भगवान शंकर से कामदेव  को दोबारा नया जीवन देने का आग्रह किया था। कुछ मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि भोलेनाथ ने उनकी प्रार्थना को स्वीकार करते हुए कामदेव और रति को राधा और श्रीकृष्ण के स्वरूप में पुनर्जन्म दिया। इसके बाद से भगवान कृष्ण और राधा मिलकर होली खेलते हैं। जिसे शिवजी ने उनकी प्रार्थना को मानकर कामदेव और रति को राधा और श्रीकृष्ण के रूप में पुनर्जन्म दिया था। तभी से भगवान कृष्ण और राधा मिलकर होली खेलते है।

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