प्वाइंट 4875 के हीरो 'राइफलमैन संजय कुमार', दुश्मन के हथियार से ही किया दुश्मन का सफाया

नेशनल डेस्कः ऊंची पहाड़ी पर खड़े दुश्मन गोलियां बरसा रहे थे और भारतीय सेना के कुछ जवान शहीद हो गए थे और कईयों के शरीर से लहू निकल रहा था। दुश्मनों को रोकने के लिए पहाड़ी पर चढ़ना जरूरी था लेकिन उनको रोका कैसे जाए। राइफलमैन संजय कुमार ने चीते-सी फुर्ती दिखाते हुए कंधे पर गन मशीन रखी और पहाड़ी चढ़ते हुए दुश्मनों की ओर बढ़ गए। संजय कुमार की फुर्ती और साहस देख दुश्मनों के भी पसीने छूट गए। संजय सिंह की आंखों में जहां युद्ध को फतह करने की आग थी तो वहीं दुश्मनों की आंखों में मौत का खौफ।


दुश्मन के हथियार से दुश्मन पर वार
कारगिल युद्ध परमवीर विजेता ‘राइफलमैन संजय कुमार’ को फ्लैट टॉप प्वाइंट 4875 पर तिरंगा फहराने का जिम्मा दिया गया था। पहाड़ी पर पहले से हू दुश्मनों ने डेरा लगा रखा था। भारतीय सेना की टुकड़ी ने जैसे ही पहाड़ी चढ़नी शुरू की, दुश्मनों ने गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। संजय के कई साथी शहीद हो गए और कई घायल होकर गिर गए। संजय सिंह रूके नहीं और कंधे पर गन मशीन रख और हाथ में एक हथगोला ले दुश्मनों की तऱ दौड़े। उन्होंने हथगोले से दुश्मनों के बंकर को उड़ा दिया। मिशन अभी खत्म नहीं हुआ था। कुछ दुश्मन पहाड़ी के पीछे छिपकर फायरिंग करने लग गए। संजय को दो गोलियां लगीं और वे बुरी तरह से घायल हो गए। लेकिन उन्होंने दुश्मनों पर मशीन गन से गोलियां दागनी शुरू कर दीं।

राइफलमैन के अदम्य साहस को देख पाकिस्तानी भी डर गए और अपनी मशीन गनें छोड़कर भागने लगे। संजय ने दुश्मनों की मशीन गनें उठाईं और उन्हीं के हथियारों से उन्हें ढेर कर दिया। तभी कुछ घुसपैठियों ने संजय पर हमला कर दिया। उनके शरीर से खून बह रहा था लेकिन उनकी हिम्मत कायम थी। उनकी टुकड़ी के कुछ जवान तब तक पहाड़ी पर पहुंच चुके थे। भारत माता की जय की गूंज के साथ सभी को ढेर कर दिया गया। पहाड़ी पर अब भारतीय सेना का कब्जा हो चुका था और ‘फ्लैट टॉप प्वाइंट 4875’ पर भारत का तिरंगा शान से लहरा रहा था।

घायल संजय कुमार को हेलिकाप्टर से श्रीनगर लाया गया। इस युद्ध में संजय की दाहिनी टांग और पीठ पर गोली लगी थी, जिनको बाद में ऑपरेशन करके उनके शरीर से निकाला गया। जाबांज ने न केवल दुश्मनों को मात दी बल्कि वे मौत को भी मात देने में सफल रहे। वर्तमान में वह बतौर नायाब सूबेदार देश की सेवा कर रहे हैं। उनके साहस और वीरत को देश आज भी सलाम करता है।

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