मृत भाई का नहीं मिला बीमा क्लेम, HDFC स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरैंस देगी 50 लाख

नई दिल्लीः एच.डी.एफ.सी. स्टैंडर्ड लाइफ इंश्योरैंस को एक मृत व्यक्ति के भाई को क्लेम न देना महंगा पड़ गया। बीमा कम्पनी ने मृत व्यक्ति का 50 लाख रुपए का बीमा किया, मगर उसकी मृत्यु के बाद कई कारण बताकर क्लेम देने से मना कर दिया। दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने सभी पक्षों के सुनने के बाद पीड़ित को 50 लाख रुपए की बीमा राशि देने का आदेश दिया है। 

क्या है मामला
फरीदाबाद के वीरपाल नागर ने अपने मृत भाई प्रताप सिंह के बीमा के संबंध में याचिका दायर की थी। याचक ने कम्पनी पर अनुचित व्यापार का तरीका अपनाने और सेवा में कोताही बरतने का आरोप लगाया था। याचक के अनुसार मृतक प्रताप सिंह ने 5 दिसम्बर 2008 को 20 साल के लिए एच.डी.एफ.सी. का 50 लाख रुपए का एक सावधि बीमा लिया था। उसके निधन के बाद नॉमिनी वीरपाल नागर ने कम्पनी के समक्ष बीमा क्लेम का दावा किया था। कम्पनी ने 19 अप्रैल 2010 को नागर का दावा खारिज कर दिया था। कम्पनी ने पॉलिसी लेने से पहले से ही मृतक को अस्थमा और पक्षाघात की बीमारी तथा पेशे के बारे में जानकारी नहीं देने का हवाला देकर दावा खारिज किया था। परेशान होकर उसने दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। 

यह कहा आयोग ने
आयोग के सदस्य अनिल श्रीवास्तव ने माना कि दावे को खारिज करने के पीछे कम्पनी ने जो आधार दिए हैं वे सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह उम्मीद करना बेमानी होगा कि एक आम आदमी किसी बीमा दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले उसकी सारी शर्तें पढ़ ले। आयोग ने कम्पनी को 2 महीने के भीतर 50 लाख रुपए भुगतान करने का निर्देश दिया। आयोग ने यह भी कहा कि किसी भी बीमारी को पुरानी बीमारी सिर्फ तभी माना जा सकता है यदि बीमाधारक उक्त बीमारी को लेकर कभी अस्पताल में भर्ती हुआ हो या उसे ऑप्रेशन कराना पड़ा हो।

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