Kundli Tv- क्या आपने देखा है हवा में झूलता यह मंदिर?

ये नहीं देखा तो क्या देखा (देखें VIDEO)
भारत एक एेसा देश है जहां मंदिरों की भरमार देखने को मिलती है। ये मंदिर व धार्मिक स्थल अपने चमत्कारों के लिए जाने जाते हैं। भारत के साथ-साथ विदेशों में भी कई तरह के चमत्कारी व अद्भुत मंदिर देखने को मिलते हैं। तो आईए आज हम आपको एेसे एक मंदिर में बताते हैं, जिसका होना भी किसी चमत्कार से कम नहीं है। जी हां, आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन चीन के शहर ताथोंग में एक एेसा मंदिर है जो कई सालों से हवा से झूल रहा है। 
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यह मंदिर विश्वभर के लोगों के आकर्षण का केंद्र भी बना हुआ है। क्योंकि यह दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जो हवा में झूलता रहता है। यह सुनकर निश्चित ही हर किसी के मन में सवाल उठता है कि हवा में झूलते इस मंदिर पर लोग दर्शन के लिए कैसे जाते होंगे। तो आपको बता दें कि इस अद्भुत मंदिर से जुड़ी अास्था लोगों की आस्था उन्हें यहां खींच लाती है। हवा में झूलने के कारण इस मंदिर का नाम हवा में झूलता मंदिर यानि हैंगिंग टेंपल रखा गया है। 
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यह मंदिर चीन के शहर ताथोंग से लगभग 65 कि.मी दूर शानसी प्रान्त के हुन्यान कस्बे में स्थित हंग पहाड़ी के बेहद संकरे स्थान पर स्थापित है। घनी पहाड़ियों के बीच घाटी में फैले एक छोटे से बेसिन पर स्थित यह मंदिर बहुत ही लंबा है। घाटी के दोनों तरफ़ करीब 100 मीटर ऊंची सीधी खड़ी चट्टानें हैं। यह मंदिर ऐसी ही सीधी खड़ी चट्टान पर लगभग 50 मीटर की ऊंचाई पर बना हुआ है जो दूर से देखने पर हवा में लटका हुआ दिखाई देता है। यह मंदिर कला और संस्कृति का अद्भुत केंद्र है। कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में बौद्ध, ताओ और कन्फ्युशियस धर्मों की मिश्रित शैली का संगम है। इसका आधे से ज्यादा भाग हवा में लटके होने से यह मंदिर पूरे विश्व में हैंगिंग टेंपल के नाम से प्रसिद्ध है।
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कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण लगभग 1500 साल पहले हुआ था। तब से लेकर आज तक इस मंदिर का आधे से ज़्यादा हिस्सा हवा में ही लटका हुआ है। चीन की भाषा में इस मंदिर का नाम शुआन खोंग है, जिसका अंग्रेजी में मतलब होता है हेंगिंग टेम्पल। इस ऐतिहासिक मंदिर को विश्व भर के पर्यटक देखने आते हैं, इस वजह से साल भर यहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। चीन में बौद्ध, ताओ और कन्फ्युशियस धर्मों की मिश्रित शैली से बना यह एकलौता अद्भुत मंदिर सुरक्षित बचा है। इस मंदिर में छोटे-बड़े 40 से अधिक भवन व मंडप हैं, जो चट्टान पर गाड़े हुए लकड़ियों से टिकाया हुए हैं। जिस कारण हवा में बने हुए लकड़ी के रास्ते पर चलने वाले लोगों की सांस अटकी रहती है।
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यह बहुमंजिला मंदिर दस से अधिक पतली-पतली लकड़ियों पर खड़ा है। मंदिर पर पहाड़ी की चट्टान का एक बाहरी हिस्सा आगे की ओर लटका हुआ है जिससे एेसा लगता है कि चट्टान का ये सिरा अभी मंदिर पर गिर जाएगा। लेकिन आज तक कभी ऐसा हुआ नहीं है। लकड़ियों से बनी पगडंडियों से होकर जाते समय पर्यटकों को हिदायत दी जाती है कि वे नीचे नही देखें क्योंकि ज़रा सी लापरवाही से सीधे खाई में गिरने का खतरा रहता है।
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