Kundli Tv- हरियाली तीज और कजली तीज दोनों एक ही है!

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भारत एक एेसा देश है जहां आए दिन त्योहार की भरमार देखने को मिलती है। त्योहार चाहे बड़ा हो या छोटा लोग हर पर्व को बड़े हर्षो-उल्लास से इन्हें मनाते हैं। देश में अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं। इसलिए यहां त्योहार और पर्व भी अलग-अलग मनाएं जाते हैं। इन्हीं त्योहारो में से एक है तीज का त्योहार। यह पर्व तृतीया तिथि को मनाया जाता है इस लिए इसे तीज कहा जाता है।


तीज ख़ास तौर पर महिलाओं का उत्सव माना जाता है। तीज के इस पावन अवसर पर स्त्रियां भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करती हैं और अपने सुहाग की सलामती की कामना करती हैं। तीज का त्योहार साल में तीन बार मनाया जाता है और ये हैं हरियाली तीज, हरतालिका तीज और कजरी तीज। आइए जानते हैं हरियाली और कजरी तीज़ के महत्व के बारे में। 

कजरी-कजली तीज 
कजरी तीज भाद्रपद के कृष्ण पक्ष को मनाई जाती है। इसे कजली, सातुड़ी, भादों और कई नामों से भी जानी जाती है। इस व्रत का पालन करके विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। इसके अलावा कुंवारी कन्याएं भी मनपसंद वर पाने की इच्छा के साथ इस दिन व्रत और पूजा करती हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार मध्य भारत के राज्य में कजली नाम का एक वन था। कहते हैं वहां के लोग कजली के नाम पर कई सारे गीत गाते थे। एक दिन वहां के राजा की मृत्यु हो गई जिसके बाद उनकी रानी भी सती हो गईं। वहां के लोग इस बात से बड़े ही दुखी रहने लगे। तब से वे कजली के गीत पति और पत्नी के प्रेम से जोड़कर गाने लगे। कजरी तीज पर सुहागन औरतें कजरी खेलने अपने मायके जाती हैं। इसके अलावा इस अवसर पर घर में झूला डाला जाता है जिस पर बैठकर महिलाएं अपनी ख़ुशी ज़ाहिर करती हैं। गेहूं, सत्तू, चावल, जौ और चना यह सब घी में मिलाकर तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। यही पकवान खाकर औरतें अपना व्रत खोलती हैं।

कजरी तीज पर गायों की भी पूजा करने की विशेष परंपरा है। शाम को व्रत खोलने से पहले महिलाएं 7 रोटियों पर चना और गुड़ रखकर गाय को खिलाती हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार में लोग नाव पर बैठकर कजरी गाते हैं। वहीं राजस्थान में इस दिन पारंपरिक नाच गाना होता है। साथ ही ऊंट और हाथी की भी सवारी की जाती है। आपको बता दें कि इस बार कजरी तीज 29 अगस्त, बुधवार को है। 

हरियाली तीज
कजरी तीज की ही तरह हरियाली तीज भी महिलाओं का ही त्योहार होता है। यह सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस दिन महादेव और माता गौरी की पूजा की जाती है। महिलाएं बिना अन्न और जल के इस कठिन व्रत का पालन करती हुई भगवान शंकर व माता पार्वती से अपने पति की लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।

हरियाली तीज पर जगह-जगह पेड़ों पर झूले लगते हैं जिस पर बैठकर महिलाएं झूमती गाती हैं। यह भी इस त्योहार को मनाने का एक तरीका है। वैसे तो इस तीज को भारत के कई हिस्सों में मनाते हैं लेकिन विशेष रूप से यह राजस्थान में मनाया जाता है। हरियाली तीज को सुहाग का प्रतीक इसलिए माना जाता है क्योंकि सबसे पहले माता पार्वती ने भोलेनाथ को पति के रूप में पाने के लिए सैकड़ों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी, तब जाकर महादेव ने उन्हें अपनी पत्नी बनाने का वरदान दिया था। आपको बता दें इस बार हरियाली तीज 13 अगस्त, सोमवार को है।

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