हनुमान जयंती: सिंदूर का जादुई प्रभाव चुटकियों में करेगा हर Problem दूर

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आध्यात्मिक ज्ञान प्रदाता महाशिव एवं व्यावहारिक कामना पूर्ति करने वाले पवन-सुत महाबली श्री हनुमान आज सबसे अधिक लोकप्रिय देवता हैं। इनकी उपासना आरोग्य, संतान प्राप्ति एवं भूत-प्रेत आदि बाधाओं से मुक्ति दिलाती है। ऐतिहासिक एवं भौगोलिक आधार के अनुसार हनुमान जी का जन्म वर्तमान कर्नाटक प्रदेश में माना गया है। यूं तो हनुमान जी की आराधना संपूर्ण भारत में की जाती है परंतु कर्नाटक में जहां भगवान राम की भेंट हनुमान जी से रामायण काल में हुई थी, लगभग हर वाहन पर हनुमान जी का सिंदूरी रंग का चित्र अंकित मिल जाएगा। सिंदूर को सुख, सौभाग्य और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। खास तरीके से इसका इस्तेमाल किया जाए, तो इसके जादुई प्रभाव मिल सकते हैं। सबसे पहले हनुमान जी के दांए पैर से टीका लेकर अपने माथे पर लगाएं।  

एक नारियल पर कामिया सिन्दूर, मौली, अक्षत अर्पित कर पूजन करें। फिर हनुमान जी के मन्दिर में चढ़ा आएं। धन लाभ होगा।

हनुमान जी के मंदिर जाकर उन्हें सिंदूर व चमेली का तेल अर्पित करें और अपनी मनोकामना कहें। जो भी व्यक्ति संकटमोचन को सिंदूर अर्पित करता है उससे वे प्रसन्न होते हैं और भक्त की सभी इच्छाएं पूरी करते हैं।

हनुमान जी के चरणों का सिंदूर लेकर उससे सफेद कागज पर स्वास्तिक बनाएं। उस कागज को मोड़े नहीं। सदा इस कागज को अपने पास रखें। प्रतिदिन इस कागज को प्रणाम करें। नौकरी से संबंधित कोई भी समस्याओं का हल होगा तुरंत। 

घर के मुख्य द्वार पर सरसों का तेल और सिंदूर का टीका लगाने से कोई भी बुरी शक्ति घर में प्रवेश नहीं कर सकती, वास्तुदोष समाप्त होते हैं, लक्ष्मी अपना स्थाई बसेरा बना लेती हैं और शनि नजर दोष से रक्षा करते हैं।

शनि के दोषों से छुटकारा पाने के लिए हनुमान जी को चोला अर्पित करें। 

 

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