हनुमान जयंतीः इस पाठ को करने से हो सकती आपकी हर मनोकामना पूरी

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हिंदू धर्म में हनुमान जयंती का पर्व इस बार 19 अप्रैल 2019 यानि कि कल मनाया जाएगा। ये त्यौहार बजरंगबली के प्रकट उत्सव के रूप में जाना जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह चैत्र महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। वैसे तो हर कोई हनुमान चालीसा का पाठ करता ही होगा लेकिन क्या किसी को पता है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए कुछ नियम हैं, जिनका पालन करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी होता है। ऐसा माना जाता है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है और साथ ही हर मनोकामना पूरी होती है। तो आइए जानते हैं चालीसा पढ़ने के नियमों के बारे में- 


दोहा:
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।। 
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। 

चौपाई:
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।

जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।

अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।

कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।

कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।

कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।

तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।

राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।

राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।

बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।

रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।

श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।

अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।

नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।

कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।

राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।

लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।

लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।

जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।

होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।

तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।

तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।

महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।

जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।

तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।

सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।

है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।

असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।

अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।

सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।

जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।

जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।

छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।

होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।

कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।। 


दोहा:
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

पाठ करते समय ध्यान रखें ये बातेंः
शास्त्रों में कहा गया है कि पाठ करने के लिए व्यक्ति को लाल धोती पहनकर बजरंगबली की प्रतिमा के सामने बैठकर ही पाठ करना चाहिए और एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हर रोज़ स्नान अवश्य करें।

पाठ करने के लिए आसन का प्रयोग करें और वह ऊनी ही होना चाहिए।  

पाठ करने से पहले भगवान के सामने घी का दीपक अवश्य जलाना चाहिए और प्रार्थना के बाद ही पाठ करना चाहिए।  

कम से कम 5 बार हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें।

कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को अस्वच्छ अवस्था में कभी हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए, इससे व्यक्ति को दोष लगता है।
 

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