पाकिस्तान से करनी चाहिए आर-पार की लड़ाई : गुरजंट सिंह

चंडीगढ़(लल्लन) : देश के जवानों की शहादत पर सरकार को उचित कदम उठाना चाहिए और पाकिस्तान के साथ आर-पार की लड़ाई होनी चाहिए। यह बात पुलवामा में शहीद हुए सुखजिन्द्र सिंह के छोटे भाई गुरजंट सिंह ने मंगलवार को मीडिया के समक्ष कही। गुरजंट तरनतारन से शहीदों के सम्मानित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए चंडीगढ़ पहुंचे थे। पाकिस्तान हमेशा हमारे सैनिकों के पीठ में वार करता आ रहा है। 

अगर पाकिस्तान से आमने-सामने की लड़ाई हो तो हमारे इतने अधिक जवान शहीद न हों। अब समय आ गया है कि भारत सरकार को इन आतंकवादियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए। मेरे परिवार में 6 लोग आर्मी में कार्यरत हैं। इनमें दो लोग रिटायर्ट हो चुके हैं। तीन आज भी पाकिस्तान के समीप इलाकों में तैनात हैं।  

उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि मुझे अपने भाई पर गर्व है। भाई ने अपने पीछे 9 माह का बेटा छोड़ गए हैं। ऐसे में सरकार से अनुरोध है कि आगे कोई बहन अपना भाई ना खोए तथा बेटा बाप को ना खोए, बाप बेटे को ना खोए। सरकार को कोई उचित कार्रवाई करनी चाहिए। 

पिता बोले-बेटे को पहले हो गई थी मौत की आहट :
पुलवामा में शहीद हुए मनिंदर सिंह को मौत की आहट पहले हो गई थी। यह कहना है पिता सतपाल अत्री का है। पुलवामा में पहुंचने के बाद मनिंद्रर सिंह चाय पीने के दौरान मुझे फोन किया और कहा कि शायद यह आखरी चाय न हो। इस बात पर मैंने पूछा कि बेटा ऐसा क्यों बोल रहे हो लेकिन उसने फोन काट दिया। दूसरे दिन पता चला की मेरा बेटा देश के लिए शहीद हो गया। 

उन्होंने मीडिया के साथ बातचीत में कहा कि मेरा छोटा बेटा भी सी.आर.पी.एफ. में तैनात है, लेकिन मैं चाहता हूं कि परिवार की देखरेख के लिए उससे पंजाब पुलिस में डी.एस.पी. पद पर तैनात किया जाए। इसके लिए पंजाब के मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री को पत्र लिख चुका हूं। बुढ़ापे में परिवार का एक मात्र सहारा है। 

बेटा था एकमात्र सहारा :
शहीद कुलविंन्द्र सिंह के पिता दर्शन सिंह का कहना है कि इकलौता बेटा हमारा एकमात्र सहारा है। लेकिन मुझे अपने बेटे पर गर्व है कि वह देश के काम आया और इतने कहते है उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। 

इसके बाद सी.आर.पी.एफ. के सीनियर डी.आई.जी.वी.के. कौंडल ने आगे बढ़कर उनके आंसू पोछें और गले लगा लिए। उन्होंने कहा कि बेटे की शादी नवंबर में तय की थी। बेटा 10 फरवरी को ड्यूटी पर गया था। लेकिन हमें नहीं मालूम था कि अब वह नहीं आएगा। सरकार को आतंकवादियों का खात्मा करना चाहिए की आने वाले समय में और कोई पीठ पर वार न कर सके। 

बनाना चाहते थे आफिसर :
पुलवामा में शहीद हुए जैमल सिंह की पत्नी सुखजीत कौर तथा माता सुखविन्द्र कौर भी सम्मानित समारोह में शामिल थी। नम आंखों से सुखजीत कौर ने कहा कि पति के सपने को पूरा करना ही मेरा उद्देश्य है। 5 साल के बेटे गुरप्रकाश सिंह को पति उच्च ऑफिसर बनाना चाहते थे। 

इसी कारण कुछ माह पहले हम चंडीगढ़ शिफ्ट हुए थे। लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। लेकिन मैंने यह ठान रखा है कि बच्चे को पढ़ा-लिखाकर ऑफिसर बनाऊंगी। जो पिंजौर में परिवार के साथ रहते हैं। मुझे पति पर गर्व है। इन वाक्यों के साथ उनकी आंखों से आंसू निकल रहे थे। 

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