फसलों पर होने वाली ई-पेमेंट पर सरकार का यू-टर्न, पहले जैसे ही होगा भुगतान

करनाल(केसी आर्या): भाजपा सरकार द्वारा 2016 से शुरू की गई फसलों के भुगतान के लिए ई-पेमेंट योजना पर खट्टर सरकार ने यू-टर्न ले लिया है। नए नियमों के मुताबिक, अनाज मंडियों में किसानों को उनकी फसलों की पेमेंट अब ऑनलाईन होने के बजाय आढ़तियों के माध्यम से ही की जाएगी। सरकार ने सोमवार की शाम को चंडीगढ़ में हरियाणा स्टेट आढ़ती एसोसिएशन के पदाधिकारियों की बैठक में यह तय किया है। इस बैठक में प्रदेश सरकार ने आढ़तियों की सभी मांगों को स्वीकार किया, जिसके बाद प्रदेश में लंबे समय से चल रही हड़ताल भी रद्द कर दी गई।



इसलिए शुरू की गई थी ई-पेमेंट
सूत्रों की माने तो प्रदेशभर की अनाज मंडियों में अनाज पर मार्केट फीस और वैट को लेकर भारी धांधलियां होती थी, जिसका उपाय केवल ई-ट्रेडिंग था, लेकिन अब फिर पहले जैसे ही हाल हो सकते हैं। व्यापारियों को कुल अनाज की खरीद पर मार्केट कमेटी को 1 प्रतिशत मार्केट फीस देनी होती है, लेकिन बड़े पैमाने पर मार्केट फीस की रकम सरकारी खजाने तक पहुंचने की बजाय मंडी प्रशासन और संबंधित व्यापारी के जेब में पहुंचती है।

ई-ट्रेडिंग से न केवल ग्रेन मार्केट में धांधलियां रुकने की उम्मीद के साथ सरकारी राजस्व में भी इजाफा होने की बात रखी गई। मैन्युल सिस्टम में मंडी में आने वाले अनाज का पूर्ण रिकॉर्ड मेनटेन नहीं होता था। कुछ विशेषज्ञों का कहना था कि ई-ट्रेडिंग शुरू होने से पहले व्यापारियों को टैक्स चोरी करने मलाई खाने को मिलती थी, इसलिए व्यापारियों ने ई-ट्रेडिंग का विरोध किया।

बीते दिन हुई बैठक में हरियाणा स्टेट आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान श्री अशोक गुप्ता, चेयरमैन रजनीश चौधरी करनाल से धर्मवीर मलिक पानीपत से और बिटु कालड़ा जी शाहबाद से, दुलीचंद जी अम्बाला से, लाडवा से विकास जी महासचिव एवं बहुत से पदाधिकारी इस मीटिंग में पहुंचे।

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