Kundli Tv- ऐसे घरों की पूजा से खुश नहीं होते भगवान

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सनातन धर्म की मानें तो धरती पर आए पहले मनुष्य ‘मनु’ थे। जगत पिता ब्रह्मा ने धरती के प्रचार-प्रसार के लिए इनका निर्माण किया था। इन्हीं मनु महाराज ने समाज और जनकल्याण की भावना से एक ग्रंथ लिखा जिसे ‘मनुस्मृति’ नाम से जाना जाता है। इस ग्रंथ में अन्य सभ्यताओं की तरह नारी को विलासिता की वस्तु नहीं माना गया बल्कि उनकी एक अलग ही गरिमा के दर्शन होते हैं। गृहस्थ आचार संहिता में बताया गया है जिस कुल में स्त्री से पति और पति से स्त्री संतुष्ट रहती है, उस कुल में अवश्य ही सदा कल्याण (मंगल) होता है। इस संदर्भ में मनुस्मृति (3/60) में कहा गया है:
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‘संतुष्टो भार्यया भर्ता भत्र्रा भार्या तथैव च। यस्मिन्नेव कुले नित्यं कल्याण तत्र वै ध्रुवम्।।’ 
स्वा प्रसूतिं चरित्रं च कुलमात्मानमेव चा स्वं च धर्म प्रयत्नेन जायां रक्षन्हि रक्षति।।  (पद्यपुराण, उत्तर 112/26)


अर्थात मनुष्य को प्रयत्नपूर्वक स्त्री की रक्षा करनी चाहिए। स्त्री की रक्षा होने से संतान, आचरण, कुल, आत्मा और धर्म की रक्षा होती है।
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राजा-प्रजा, गुरु-शिष्य, पति-पत्नी, पिता, पुत्र के पुण्य-पाप का छठा अंश प्राप्त करता है। जो केवल अपने लिए भोजन बनाता है, जो केवल काम सुख सोचता है और जो केवल आजीविका प्राप्त करने के लिए पढ़ाई करता है उसका जीवन निष्फल है। जिस घर में सब बर्तन इधर-उधर बिखरे हों, बर्तन टूटे हों, स्त्रियां मारी-पीटी जाती हों, वह घर पाप के कारण दूषित हो जाता है। उस घर की पूजा देवता भी स्वीकार नहीं करते।
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