Kundli Tv- एेसे लोगों को 1 खरोंच तक नहीं आने देते भगवान

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गीता एक एेसा ग्रंथ जिसमें बहुत से एेसे श्लोक दिए गए हैं, जिसमें प्रभु तक पहुंचने से लेकर उन्हें पाने तक का मार्ग बताया गया है। आज हम आपको गीता के एक एेसे ही श्लोक के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें श्रीकृष्ण ने स्वयं बताया है कि उन्हें कौन से भक्त सबसे ज्यादा प्रिय हैं। 
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श्लोक-
सुरक्षित गोस्वामीअनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जना: पर्युपासते। 
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्।। गीता 9/22।।

अर्थात:
जो भक्त पूर्ण मन से मुझे याद करते हुए मुझे पूजते हैं, ऐसे नित्य युक्त साधकों के सभी अच्छे-बुरे कर्मों का मैं स्वयं भोगता हूं।
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व्याख्या:जिस व्यक्ति के मन में हर समय केवल मैं यानि परमात्मा ही बसे हों और उनसे बढ़कर दुनिया में उसके लिए कोई न हो, वही भक्त है। भगवान कहते हैं कि जो भक्त हर पल केवल मेरा ही चिंतन करता हो, कोई भी भाव को अपने भीतर न आने देता हो, केवल मेरा ही पूजन करता है, ऐसे निरंतर परमात्मा से जुड़े साधकों की साधना की रक्षा मैं स्वयं करता हूं। अर्थात भक्त ने जो भी साधना आज तक की है, वह संस्कार रूप में चित्त में जाकर इक्कट्ठी हो जाती है, फिर उसका नाश नहीं होता, क्योंकि परमात्मा उसकी रक्षा करते हैं और वह साधना, साधक को अध्यात्म मार्ग में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहती है।"
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