गीता गोपीनाथ ने पेश की IMF की अपनी पहली रिपोर्ट, भारतीय अर्थव्यवस्था पर की बड़ी भविष्यवाणी

नई दिल्लीः भारतीय मूल की मशहूर अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) की चीफ इकोनॉमिस्ट का पद संभालने के बाद वैश्विक विकास की पहली रिपोर्ट पेश करते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था पर बड़ी भविष्यवाणी की है। उन्होंने कृषि ऋण माफी को लेकर कहा कि ऐसे लोकलुभावन उपायों से किसानों की समस्याओं का स्थाई समाधान नहीं होगा। इसके बजाय कैश सब्सिडी बेहतर रहेगा।

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मौके पर गीता गोपीनाथ ने बताया, 'मेरा मामना है कि कृषि क्षेत्र पर भारी संकट है और कृषि ऋण माफी स्थाई समाधान नहीं है।' उन्होंने कहा कि कैश सब्सिडी ऋण माफी के मुकाबले बेहतर होगा।

गोपीनाथ ने कहा कि कैश सब्सिडी, ऋण माफी से बेहतर और व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि सरकारों को किसानों को पैदावार बढ़ाने के लिए बेहतर तकनीक और बीज जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए कई राज्य सरकारों ने कृषि ऋण माफी की घोषणा की है।

2019 में रफ्तार पकड़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था
गोपीनाथ ने कहा कि कृषि क्षेत्र और रोजगार सृजन एनडीए सरकार के लिए प्रमुख मुद्दा है। यह इस साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख चिंता का विषय भी रहेगा लेकिन यह विकास दर मदृेनजर सकारात्मक भी रहेगा। वर्ल्ड इकोनॅामिक आउटलुक अपडेट में कहा गया है कि 2019-20 के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से आगे बढ़ेगी। जबकि इस दौरान वैश्विक स्तर पर मंदी रहने के आसार रहेंगे। वहीं भारत 7.5 फीसदी की विकास दर से आगे बढ़ेगा। 2020-21 के दौरान भारत की विकास दर 7.7 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद है। इस दौरान चीन की विकास दर 6.2 फीसदी रहने का अनुमान है।

चीन की विकास दर कमजोर होगी
इसमें चीन की विकास दर 2017 के 6.9 प्रतिशत से घटकर 2018 में 6.6 प्रतिशत और 2019 तथा 2020 में और कम होकर 6.2 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना बताई गई है। वहीं वैश्विक विकास दर 2017 के 3.8 प्रतिशत की तुलना में 2018 में 3.7 प्रतिशत और 2019 में 3.5 प्रतिशत रहने का पूर्वानुमान है। इसके 2020 में फिर से सुधरकर 3.6 प्रतिशत पर पहुंचने की संभावना है। 

Related Stories:

RELATED पाकिस्तान, आईएमएफ के साथ करार के करीब