गोलछा जी की गजब दुकान: बाहर लटके हैं चिथड़े, एंट्री करते ही उड़ जाते हैं होश

बालाघाट:मध्य प्रदेश अजब है और यहां होने वाले कारनामे गजब। ये हम नहीं कह रहे, ये बयां करती हैं यहां होने वाली घटनाएं और वाकया। इस बार जो वाकया सामने आया है वो हैरान कर देने वाला है। आमतौर पर आपने देखा होगा कि आजकल कपड़ों की दुकान पर ग्राहकों को लुभाने के लिए तरह-तरह तरीके अपनाए जाते हैं, लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। लेकिन इस बीच हम आपको आज एक ऐसी दुकान के बारे में बताएंगे, जो है तो छोटी सी और जिसके मालिक दुकान की ब्रांडिंग के लिए ऐसा कोई तरीका नहीं अपनाते। फटे-पुराने कपड़े इस दुकान की पहचान है। इस दुकान को देखकर आप भी ये कहने को मजबूर हो जाएंगे ‘छोटी दुकान-ऊंचा पकवान’।

दुकान के बाहर टंगे हैं फटे-पुराने कपड़े
सामने से शकल देखकर लगता है कि ये कपड़ों की दुकान है। क्योंकि बाहर कपड़े ही टंगे हैं, लेकिन ये अजीब बात है कि कपड़े फटे पुराने हैं। दुकान के सामने का डिस्पले बेहद गंदा है। जिसे देखकर आपका इस दुकान के अंदर जाने का मन नहीं करेगा। लेकिन अगर आप एक बार अंदर चले गए, तो दुकान में आपको वो कपड़ा मिल जाएगा जो पूरे बाजार की दुकानों में नहीं है।



दुकान और दुकानदार ?
ये दुकान मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले की वारासिवनी तहसील में हैं। दुकानदार का नाम पीयूष गोलछा है और दुकान का मानीबाई गोलछा साड़ी एंड रेडीमेड। दुकान मार्केट में सबसे पहले 8 बजे खुल जाती है। लेकिन इससे पहले दुकानदार गोलछा जी जो धार्मिक विचारों के व्यक्ति हैं, सुबह-सवेरे धोती पहनकर पूजा करने मंदिर जाते हैं और लौटकर दुकान खोलते हैं। ये दुकान उनके घर में ही है जिसकी ओपनिंग 15 फरवरी 2012 को हुई थी और घर 2013 में बनाया। इस वाकया के बारे में जानकर शायद आपके मन में भी वो कहावत आ गई होगी कि ‘दुकान से मकान बन सकता है लेकिन मकान से दुकान नहीं’।



दुकान खोले जाने का है दिलचस्प किस्सा
दुकानदार पीयूष ने 2008 में 12वीं में स्कूल टॉप किया और इसके बाद उन्होंने बी कॉम और एम कॉम की पढ़ाई की। इसके बाद पीयूष सीए की कोचिंग के लिए रायपुर चले गए। इस बीच उनके पापा की तबीयत काफी खराब हो गई। उनकी पहले से कपड़े की दुकान है। वो चाहते थे कि उनका बेटा पीयूष एक और कपड़े की दुकान खोल ले। लेकिन उसने नहीं खोली। घर में गहमा गहमी भी हुई और आखिरकार पीयूष ने ये दुकान खोल ही ली।



दुकान की कमाई ?
इस दुकान के बारे में जानकार ये जिज्ञासा होती है कि जब बाहर से ही इस दुकान का इतना बुरा हाल है तो अंदर से इसकी हालत क्या होगी। लेकिन आपको बता दें कि ऐसा नहीं है। ये अकेली दुकान बाजार के 80 से 90 दुकान पर भारी है। कपड़ा बिक्री के लिए ये सभी दुकानों को मात देती है। यहां हर तरह का कपड़ा आपको मिलेगा। बाहर से लोग फटे कपड़े टंगे देखकर हंसते हुए अंदर घुसते हैं तो भौचक रह जाते हैं। इस दुकान के बारे में यहीं कह सकते हैं कि यहां 400 में चार साड़ियां और 20 हजार की एक भी मिल सकती है।



झूठ साबित हुई ‘जो दिखता है वो बिकता है’ वाली बात...
अक्सर दुकानदार और ग्राहक जो दिखता है वो बिकता है की पॉलिसी मन में लेकर काम करते हैं। लेकिन साहब इस दुकान ने इस पॉलिसी को पलटकर रख दिया है। यहां ऐसा नहीं चलता। यहां तो वो बिकता है जो मानीबाई गोलछा साड़ी एंड रेडीमेड वाले बेचते हैं।

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