पूर्व चीफ जस्टिस लोढ़ा ने भी उठाए जस्टिस खन्ना की नियुक्ति पर सवाल

नई दिल्लीःउच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों द्वारा पिछले वर्ष किए गए संवाददाता सम्मेलन से कोई उद्देश्य पूरा नहीं हुआ और इसके बजाए इस दौरान उच्च अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में कोलेजियम के कामकाज को लेकर उठाए गए मुद्दे और बिगड़ गए। यह बात बुधवार को एक पूर्व प्रधान न्यायाधीश ने कही। संवाददाता सम्मेलन में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई भी मौजूद थे।


न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आर. एम. लोढा ने सीजेआई गोगोई के नेतृत्व वाले पांच सदस्यीय कोलेजियम के निर्णय की आलोचना की जिसने वरिष्ठ न्यायाधीशों की अनदेखी कर दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजीव खन्ना को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश बनाने की अनुशंसा की। न्यायमूर्ति लोढा 27 अप्रैल 2014 से 27 सितम्बर 2014 तक प्रधान न्यायाधीश थे। उन्होंने कहा कि 12 जनवरी 2018 को किए गए विवादास्पद संवाददाता सम्मेलन में वर्तमान सीजेआई दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के तौर पर मौजूद थे जिसमें उनके पूर्ववर्ती न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ कई मुद्दे उठाए गए थे और इसमें उच्च अदालतों में न्यायाधीशों की नियुक्ति भी एक मुद्दा था।

न्यायमूर्ति लोढा ने पीटीआई को बताया, ‘‘मुद्दा वही है। इस कदम से यह और बढ़ ही गया है। मुझे नहीं लगता कि कोई बदलाव आया। कम से कम यह दिख तो नहीं रहा है। इससे उद्देश्य पूरा नहीं हुआ क्योंकि हमें कोई बदलाव नजर नहीं आया जिसके लिए संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया गया था।’’  संवाददाता सम्मेलन में मौजूद अन्य न्यायाधीश-न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूॢत कुरियन जोसफ सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

यह पूछने पर कि आगे क्या होगा तो न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) लोढा ने कहा कि अगर कोलेजियम ने अनुशंसा की है तो गेंद केंद्र सरकार के पाले में है और जब तक कोलेजियम इसे वापस नहीं लेता तब तक नहीं लगता कि इसमें कोई बदलाव होगा। उन्होंने कहा, ‘‘अब सरकार निर्णय करेगी और इसे राष्ट्रपति के पास भेजेगी। पूरी प्रतिक्रिया और धारणा को देखते हुए अच्छा होगा कि मामले को वापस लिया जाए और मामले पर गहनता से विचार किया जाए लेकिन मुझे ऐसा होता नहीं दिख रहा है।’’

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