सूचना आयोग में सब कुछ अच्छा नहीं चल रहा

आर.टी.आई. अधिनियम में प्रस्तावित परिवर्तनों के चलते चल रहे विवाद की पृष्ठभूमि में सरकार ने पात्र उम्मीदवारों से पारदर्शिता को बढ़ावा दे रहे केन्द्रीय सूचना आयोग (सी.आई.सी.) में सूचना आयुक्तों के रिक्त पद भरने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। सी.आई.सी. में 10 स्वीकृत पदों के मुकाबले में सिर्फ छ: सूचना आयुक्त (आई.सी.) ही काम कर रहे हैं। 

केन्द्रीय सूचना आयोग की प्रमुखता मुख्य सूचना आयुक्त आर.के. माथुर कर रहे हैं। कई आर.टी.आई. कार्यकत्र्ता और सरकार पारदर्शिता कानून में प्रस्तावित परिवर्तनों पर जोर दे रही है। कार्यकत्र्ताओं ने दावा किया है कि प्रस्तावित परिवर्तन कानून और इसके उद्देश्यों को महत्वहीन कर देंगे। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, मुख्य सूचना आयुक्त और आई.सी. की सेवा के वेतन, भत्ते और अन्य नियम व शर्तें ‘केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जा सकती हैं’। केन्द्र और राज्यों में सूचना आयुक्तों के कार्यकाल को ‘पांच साल की अवधि’ से ‘केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों’ में संशोधित करने का प्रस्ताव है। सूचना आयोगों की सेवा के वेतन, भत्ते और अन्य नियम व शर्तें चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति के समय तय की जा सकती हैं। आई.सी.एस. के पद के लिए आवेदन मांगने वाला नवीनतम विज्ञापन सरकार के इरादे को स्पष्ट करता है कि अधिनियम में प्रस्तावित परिवर्तन संसद से मंजूरी प्राप्त कर सकता है। 

केन्द्रीय पदों के लिए इच्छुक उम्मीदों से कम:केन्द्र में काम करना कई बाबुओं के लिए एक रोमांचक संभावना की तरह प्रतीत नहीं होता है। केन्द्र ने 24 अगस्त तक कम से कम चार केन्द्रीय संयुक्त सचिव स्तर के पदों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। ये पद पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, कपड़ा, वाणिज्य और उद्योग तथा स्वास्थ्य मंत्रालयों के अधीन आते हैं। यद्यपि कोई कारण स्पष्ट नहीं किया जा रहा है, ऐसा माना जाता है कि सरकार को उपयुक्त आवेदकों की कम संख्या में आवेदन आने के कारण आवेदन की तारीख बढ़ाने का संकेत दिया गया था। जिन पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं उनमें चेयरमैन-सह-प्रबंध निदेशक (सी.एम.डी.) (जे.एस. स्तर), हस्तशिल्प और हैंडलूम निर्यात निगम लिमिटेड (एच.एच.ई.सी.), नोएडा; सचिव (जे.एस. स्तर), तेल उद्योग विकास बोर्ड (ओ.आई.डी.बी.)); विकास आयुक्त (संयुक्त सचिव स्तर), कोचीन विशेष आर्थिक क्षेत्र (सी.एस.ई.जैड.), कोचीन और वरिष्ठ उप-महानिदेशक (प्रशासन) (जे.एस. स्तर), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आई.सी.एम. आर.), नई दिल्ली शामिल हैं।

बिहार ने बाबुओं के तबादलों को रोका :बिहार के कैडर आई.ए.एस. अधिकारी जितेंद्र गुप्ता द्वारा हरियाणा में इंटर-कैडर तबादले की मांग काफी बड़ा विवाद बनती जा रही है। बिहार में परिवहन ‘माफिया’ से अपने जीवन के कथित खतरे के बाद राज्य सरकार अब गुप्ता की याचिका पर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में गई है। 2015 में, 2013-कैडर आई.ए.एस. अधिकारी ने कुछ संगठित गिरोहों के खिलाफ मजबूती से काम किया और तभी से उनकी जिंदगी को खतरा बढ़ गया है लेकिन राज्य सरकार ऐसे किसी भी खतरे से इंकार कर रही है लेकिन हाल ही में एक आर.टी.आई. याचिका ने बिहार पुलिस की एक आंतरिक रिपोर्ट का खुलासा किया जो बाबू के दावे की पुष्टि करती है। पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘‘गुप्ता को माफिया द्वारा रिश्वत के मामले में फंसाने की पूरी तैयारी की गई थी और माफिया और सामाजिक-विरोधी तत्वों से उनके जीवन के लिए खतरा है।’’ 

उन्हें वर्तमान में ऑफिसर ऑन स्पैशल ड्यूटी, पर्यावरण और वन विभाग के अधिकारी के रूप में तैनात किया गया था। गुप्ता हरियाणा में इंटर-कैडर हस्तांतरण के लिए एस.सी. चले गए क्योंकि उन्हें पटना में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और उन्हें धमकियां भी मिली हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुप्ता की शिकायतों पर विचार करने और उचित कार्रवाई करने के लिए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डी.ओ.पी.टी.) को निर्देशित किया है।-दिलीप चेरियन

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