इलेक्शन डायरी: इंदिरा के आपातकाल से डूबी कांग्रेस

इलेक्शन डेस्क(नरेश कुमार):पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को देश की महिला प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ पाकिस्तान को विभाजित करके बंगलादेश का गठन करवाने के तौर पर भी याद किया जाता है लेकिन अपने शासनकाल में उनसे भी एक ऐसी चूक हुई जिसने कांग्रेस को भारी नुक्सान पहुंचाया। यह चूक 25 जून, 1975 को देश में आपातकाल लागू करने की थी। यह आपातकाल 21 महीने तक रहा। 


हालांकि आपातकाल लागू करते वक्त इंदिरा ने देश की कानून व्यवस्था बिगडऩे का हवाला दिया था लेकिन इसके पीछे की असल वजह इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला था जिसमें अदालत ने रायबरेली लोकसभा सीट से उनका निर्वाचन रद्द कर दिया था। अदालत ने यह फैसला समाजवादी नेता राज नारायण की याचिका पर दिया था।

इंदिरा ने राज नारायण को 1971 के चुनाव में हराया था और नारायण ने अदालत में दायर की गई याचिका में आरोप लगाया कि इंदिरा ने चुनाव जीतने के लिए भ्रष्ट तरीकों का सहारा लिया और चुनाव के दौरान खर्च किए जाने वाले पैसे की सीमा से ज्यादा खर्च किया। 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी का निर्वाचन रद्द कर दिया और उन्हें 20 दिन के अंदर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय भी दिया। 

24 जून 1975 को सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा गांधी को राहत देते हुए उनकी सदस्यता बरकरार रखी लेकिन मामले के फैसले तक उन्हें सदन में वोट के अधिकार से वंचित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक अध्यादेश जारी करके राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के हस्ताक्षर करवाकर आपातकाल लागू कर दिया। आपातकाल दौरान प्रैस का गला दबाया गया। कई विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया। आपातकाल हटने पर 1977 के चुनाव हुए तो लोगों का गुस्सा इंदिरा के खिलाफ निकला और कांग्रेस 154 सीटों पर सिमट गई और विपक्ष को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ जबकि 1971 में हुए चुनाव के दौरान कांग्रेस को 352 सीटें हासिल हुई थीं।  

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