DU: पुस्तक विवाद से इतिहास विभाग का किनारा

नई दिल्लीःदिल्ली यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग ने नंदिनी सुंदर और अर्चना प्रसाद द्वारा लिखी गई दो किताबों को लेकर उपजे विवाद से खुद को अलग कर लिया है। स्टैंडिंग कमिटी में दोनों पुस्तकों का उनके कॉन्टेंट के कारण विरोध किया गया। कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई है कि पुस्तक में नक्सलवाद का महिमामंडन किया गया है और जनजातियों के धर्म परिवर्तन को उचित करार दिया गया है। इस पर विभाग की ओर से कहा गया है कि कुछ सदस्यों की आपत्ति के बाद किताबों को यूनिवर्सिटी की रीडिंग लिस्ट से हटाने के मामले पर चर्चा नहीं की जाएगी। 

 

28 अगस्त को स्टैंडिंग कमिटी की मीटिंग हुई थी जिसमें एक सदस्य गीता भट्टा ने नंदिनी सुंदर की किताब ‘Subalterns and Sovereigns: An Anthropological History of Bastar, 1854-2006’ का एक हिस्सा पढ़कर सुनाया और दावा किया सुंदर ने इसके माध्यम से नक्सलियों की कार्रवाई को उचित ठहराया है। रीडिंग लिस्ट से किताब को हटाने की भट्टा की मांग का समर्थन करते हुए अन्य कुछ सदस्यों ने अर्चना प्रसाद की किताब ‘Against Ecological Romanticism: Verrier Elwin and the Making of an Anti-modern Tribal Identity’ पर आपत्ति जताई और कहा कि इसमें जनजातियों के ईसाई धर्म में परिवर्तन का समर्थन किया गया है। 

 

इस बीच कुछ सदस्यों ने किताबों को रीडिंग लिस्ट से हटाने की मांग का विरोध किया है। स्टैंडिंग कमिटी के एक सदस्य ने  बताया, 'हमें इस मामले को यहां नहीं उठाना चाहिए क्योंकि इसके लिए यह सही मंच नहीं है।' एक फैकल्टी मेंबर ने बताया कि इतिहास विभाग ने फैसला किया है, 'पाठ्यक्रम पर चर्चा करने के लिए गठित हमारी कमिटी दोनों पुस्तकों पर न तो चर्चा करेगी औ न ही उनको हटाने की सिफारिश करेगी।' फैकल्टी मेंबर ने यह भी कहा, 'स्टैंडिंग कमिटी ने कोर्स स्ट्रक्चर पर भी आपत्ति जताई है और हमें इस पर दोबारा गौर करने के लिए कहा है क्योंकि हमें कोर सब्जेक्ट कैटिगरी में बड़ी संख्या में चॉइस दी गई थी।'

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