जिस घर में शुक्रवार को होता है ये काम, उस परिवार पर महालक्ष्मी रहती हैं मेहरबान

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धन के अभाव में मनुष्य मान-सम्मान और प्रतिष्ठा से वंचित रहता है। ऐसा शास्त्रों में वर्णन है की व्यक्ति को दरिद्रता दूर करने हेतु मां लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए। पुराणों के अनुसार लक्ष्मी को चंचला कहा जाता है अर्थात जो कभी एक स्थान पर रूकती नहीं।

अतः लक्ष्मी अर्थात धन को स्थायी बनाने के लिए कुछ उपाय, पूजन, आराधना, मंत्र-जाप आदि का विधान है। शुक्रवार मां लक्ष्मी का प्रिय दिन है। इनकी कृपा जिस घर-परिवार पर हो जाती है, वहां सुख-संपति सदा बनी रहती है। जिस घर में सभी पारिवारिक सदस्य मिलकर लक्ष्मी माता की आरती करते हैं, वह उस घर पर सदा प्रसन्न रहती हैं। 

लक्ष्मी माता की आरती
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। 
तुमको निस दिन सेवत, हर विष्णु धाता ॥ ॐ जय...॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ ॐ जय...॥

दुर्गारूप निरंजनि, सुख सम्पति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि-धन पाता ॥ ॐ जय...॥

तुम पाताल निवासिनि, तुम ही शुभ दाता।
कर्म प्रभाव प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता ॥ ॐ जय...॥

जिस घर तुम रहती, तहं सब सद्गुण आता। 
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥ ॐ जय...॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥ ॐ जय...॥

शुभ गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥ ॐ जय...॥

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनंद समाता, पाप उतर जाता ॥ ॐ जय...॥

कुंभ के बारे में कितना जानते हैं आप !


 

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