Kundli Tv- पूजा पाठ में हो जाए कोई गलती तो ये मंत्र पढ़ना न भूलें

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पूजा-पाठ, हवन-यज्ञ आदि कोई भी धार्मिक काम करते समय जान-अनजाने में भूल हो जाती है। जिससे मन में वहम आने लगता है, जानें भविष्य में क्या गलत होगा या किसी अनहोनी का भय हर दम-हर पल सताता रहता है। कुछ ज्यादा गलत होने पर देवी-देवताओं के प्रकोप का भय भी बना रहता है। आपके साथ भी जब कुछ ऐसा हो जाए तो देवी-देवताओं से अपराध के लिए क्षमा मांगे और इस मंत्र का जाप करें।

"अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।। गतं पापं गतं दु:खं गतं दारिद्रय मेव च। आगता: सुख-संपत्ति पुण्योऽहं तव दर्शनात्।।"

वास्तु के अनुसार कुछ बातों का रखें ध्यान 
घर के पूर्व-उत्तर में पूजा का स्थान सर्वोत्तम माना गया है। इस स्थान पर पूजा स्थल होने से घर में रहने वालों को शांति, सुकून, धन, प्रसन्नता और स्वास्थ्य का लाभ मिलता है। सीढिय़ों या रसोई घर के नीचे, शौचालय के ऊपर या नीचे कभी भी पूजा का स्थान नहीं बनाना चाहिए।

उत्तर-पूर्व के कोण को ईशान कोण माना गया है। ईशान कोण वैसे भी देवताओं का स्थान माना गया है। यहां स्वयं भगवान शिव का भी वास होता है। देव गुरु बृहस्पति और केतु की दिशा भी ईशान कोण ही माना गया है। यही कारण है कि यह कोण पूजा-पाठ या अध्यात्म के लिए सबसे बेहतर होता है। यह भी ध्यान देने की बात है कि पूजा स्थल पर बीच में भगवान गणेश की तस्वीर या मूर्ति जरूर होनी चाहिए।

मूर्तियां छोटी और कम वजनी ही बेहतर होती हैं। अगर कोई मूर्ति खंडित या क्षतिग्रस्त हो जाए तो उसे तुरंत पूजा स्थल से हटा कर कहीं बहते जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। यह भी ध्यान देना चाहिए कि भगवान का चेहरा कभी भी ढका नहीं होना चाहिए। यहां तक कि फूल-माला से भी चेहरा नहीं ढकना चाहिए।
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