गिरते लिंगानुपात के सुधार को ऊना प्रशासन की अनूठी पहल, जानने के लिए पढ़ेंं खबर

ऊना (अमित): जिला ऊना के माथे से कम शिशु लिंगानुपात वाले जिला होने का बदनुमा दाग मिटाने के लिए जिला प्रशासन ने एक अनूठी पहल की है। डी.सी. ऊना राकेश प्रजापति के प्रयास से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत ऊना उत्कर्ष योजना का आगाज किया गया, जिसका शुभारंभ पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने किया। इस योजना का मकसद ऊना की बेटियों और उनके माता-पिता को सम्मानित करना है तथा समाज की बेटियों के प्रति नकारात्मक सोच को बदलना है। ऊना उत्कर्ष योजना का शुभारंभ जिला के 100 परिवारों को डी.सी. कार्ड वितरित करने के साथ किया गया। डी.सी. कार्ड उन माता-पिता को प्रदान किए जाएंगे जिनकी केवल बेटियां हैं। इस कार्ड के माध्यम से जिला के किसी भी सरकारी कार्यालय में इन परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।
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बेटी के नाम पर प्रतिष्ठान खोलने पर मिलेगी प्रोत्साहन राशि
डी.सी. ने कहा कि इस योजना के अंतर्गत जनसहभागिता सुनिश्चत करने के लिए दुकानों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मलिकों को बेटी के नाम पर अपने प्रतिष्ठानों का नामकरण करने के लिए प्रेरित किया जाएगा जिसके लिए उन्हें 2100 रुपए बतौर प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त जिन पंचायतों में वर्ष 2017-18 के आंकड़ों के अनुसार कन्या लिंगानुपात 800 के कम है, उन पंचायतों में पहली बेटी के जन्म 11 हजार, दूसरी बेटी के जन्म पर 21 हजार और तीसरी बेटी के जन्म पर 51 हजार रुपए की राशि प्रदान की जाएगी। इसी योजना के तहत गांव का नाम रोशन करने वाली बेटियों के पंचायत स्तर पर होर्डिंग लगाएं जाएंगे और उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा। इसी तरह चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट के सहयोग से धर्मार्थ योजना के तहत बेटी के जन्म से लेकर पढ़ाई और शादी पर आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।
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पंचायती राज मंत्री ने की डी.सी. के प्रयासों की सराहना
पंचायती राज मंत्री ने जिला प्रशासन द्वारा बेटियों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऊना उत्कर्ष योजना के माध्यम से ये प्रयास जन-जन तक पहुंचेंगे तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान अपने उदेश्य में सफल होगा। उन्होने कहा कि डी.सी. राकेश कुमार प्रजापति की इस अनूठी पहल को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के माध्यम से पूरे प्रदेश भर की पंचायतों में लेकर जाएंगे तथा पंचायत में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली बेटियों की पहचान कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। वही इस योजना के लाभार्थियों और स्थानीय लोगों ने भी जिला प्रशासन की इस पहल की जमकर सराहना की। लोगों की मानें तो इस पहल से लोगों का नजरिया बदलेगा और लोग बेटों और बेटियों में करने वाले भेदभाव से पीछे हटेंगे।
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प्रशासन का दावा, 1000 लड़कों के पीछे 915 लड़कियां
दरअसल जिला ऊना देश के उन 100 जिलों में शुमार है जहां 2011 जनगणना के अनुसार शिशु लिंगानुपात बहुत कम है। वर्ष 2011 के आंकड़ों के अनुसार जिला में 1000 शिशु लडकों के पीछे शिशु लड़कियों की संख्या केवल 875 है जबकि प्रशासन इसमें सुधार का दावा करते हुए अब 1000 लड़कों के पीछे लड़कियों की संख्या 915 होने का दावा कर रहा है। जिला ऊना को इसी कलंक से छुटकारा दिलाने के लिए डी.सी. राकेश कुमार प्रजापति के प्रयास से यह योजना शुरू की गई है।

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