नजरिया: ऐसे तो विश्वगुरु नहीं बन पाएगा भारत

नेशनल डेस्क (संजीव शर्मा ):  ये काफी दिलचस्प है और सोचनीय भी। एक तरफ डिजिटल इंडिया को आगे बढ़ाते हुए एक नामी कम्पनी सस्ते मोबाइल और नेट /ब्रॉडबैंड के बड़े बड़े ऐलान कर रही है। दूसरी तरफ एक ही परिवार के 11 लोग मोक्ष  पाने और  अदम्य शक्तियों संग फिर से जिन्दा हो उठने की चाह में फंदे पर झूल जाते हैं। 
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एक तरफ साधुवेश धारण करने वाले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ  सूखा खत्म करने के लिए हेलीकाप्टर से बारिश की योजना बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ कर्नाटक के दूसरे सबसे बड़े मंत्री रोजाना 342  किलोमीटर का सफर इसलिए कर रहे हैं क्योंकि उनको जो बंगला मिला है ज्योतिषी के मुताबिक वो शुभ नहीं है। यह तमाम बातें हैरान कर देने वाली हैं। दरअसल यह  देश की सबसे बड़ी दुविधा है। हम बातें 21 वीं सदी में  विश्वगुरु बनने की करते हैं। लेकिन हरकतें अभी भी 14 वीं शताब्दी वाली हैं। जब तक हम इस भंवर से बाहर नहीं निकलते देश कभी भी तरक्की नहीं कर सकता। इसी भंवर में धर्म-जाति औरक्षेत्रवाद जैसे काम वायु दबाव वाले तत्व भी हैं जो एक बार इसमें फंसने वाले को कसकर पकड़ लेते हैं। हम चीन के बाद सबसे  ज्यादा जनसंख्या वाला देश हैं। ऐसे में हमारे पास अकूत मानवशक्ति है जिसके दम पर हम कुछ भी  कर सकते हैं। लेकिन इसके बावजूद यह तथ्य हमारे लिए सामथ्र्य नहीं शिथिलता साबित हो रहा है।

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यदि जनसंख्या अधिक होना महज समस्या ही होती तो चीन हमसे ज्यादा संकट में होता। लेकिन आज अगर महाशक्तियों की कोई चिंता है तो वह एकमात्र चीन है।  रूस, अमेरिका सब चीन को सामने रखकर ही अपनी योजनाएं बना रहे हैं। यहां तक कि खुद भारत भी चीन को लेकर चिंतित है।  लेकिन चीन के प्रभाव में  वृद्धि लगातार जारी है। सीपीईसी बन गया तो चीन दोगुना शक्तिशाली हो जाएगा। लेकिन यह भी शाश्वत सत्य है कि  तब तक  हमारे देश में  बीस करोड़  लोग  और जुड़ चुके होंगे। ऐसे में यही समय है जब हमें इन  बाधाओं और बंधनो से निकलना ही होगा। इस काम में हमारा सबसे बड़ा सहायक हमारा आत्मबल  है। अन्धविश्वास को त्यागकर वैज्ञानिक सोच अपनानी होगी। गाय और सूअर जैसे  विषयों पर  जब हम वैज्ञानिक सोच  अपना लेंगे तो झगडे कम और  दूध-घी और मांस का उत्पादन कई गुना बढ़ जायेगा जो आर्थिक संमृद्धि का सूत्रपात करेगा। अन्य क्षेत्रों में भी लागू होती है। जब आर्थिक समृद्धि होगी तो भ्ष्र्टाचार भी स्वयमेव कम होता जाएगा। क्योंकि यह कहीं न कहीं कमजोर आर्थिक दशा से ही जुड़ा हुआ है। 
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सरकारों के लिहाज से शिक्षा पर ज्यादा से ज्यादा जोर होना जरूरी है। स्कूलों में सिर्फ कमरे ही न हों वहां शिक्षक और शिक्षा का आधारभूत ढांचा भी हो यह सुनिश्चित बनाना होगा। जिस तरह से पोलियो और मलेरिया जैसी बीमारियों के लिए टीकाकरण अभियान चलाया गया है उसी तरह सबको उच्च  शिक्षा  के लिए भी अभियान चलाने होंगे।  जब लोग शिक्षित होंगे तो वे अन्धविश्वास और गरीबी से बच जाएंगे। फिर किसी परिवार को इसलिए फंदा नहीं लगाना होगा कि उसे दैवीय शक्तियां मिल सकें, उसे खुद  पर ही सबहासिल कर सकने का भरोसा होगा। फिर कोई मंत्री भी इसलिए रोज 342 किलोमीटर नहीं चलेगा कि किसी घर विशेष में रहने से उसका मंत्रिपद चला जाएगा। उसे यह क्लीयर होगा कि  काम ही कुर्सी बचाएगा। और जब सबको अपनी शक्ति,सामथ्र्य कर्तव्यों-अधिकारों का बोध होगा तो भारत स्वत : विश्वगुरु बन जाएगा।  

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