येदियुरप्पा की डायरी के पन्ने हैं फर्जी, आयकर विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण

नई दिल्लीःकेन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने शुक्रवार को कहा कि कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा से संबंधित एक डायरी को लेकर जो खबरें आ रही है वह निर्मूल हैं और कांग्रेस नेता डी के शिवकुमार ने कभी भी मूल डायरी उपलब्ध नहीं करायी।

सीबीडीटी ने जारी किया बयान
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ‘येदियुरप्पा डायरी’ के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करने और भाजपा में सभी ‘चौकीदार’ को चोर बताने के बाद सीबीडीटी ने यहां जारी बयान में कहा कि आयकर कानून की धारा 132 के तहत शिवकुमार और उनके समूह की दो अगस्त 2017 को जांच की गयी थी, जिसमें बड़े पैमाने पर आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किये गये थे।

दस्तावेज की मूल प्रति नहीं
जांच के दौरान कुछ अलग-अलग पन्ने मिले थे जो कर्नाटक विधानसभा की विधायी डायरी 2009 के पन्ने की छाया प्रति थी और उसमें कुछ लोगों के नाम के आगे आंकड़े लिखे हुए थे। शिवकुमार ने इस दस्तावेज की मूल प्रति कभी उपलब्ध नहीं करायी। इस संबंध में शिवकुमार ने अपने बयान में कहा कि यह येदियुरप्पा की डायरी के पन्ने हैं और पूर्व मुख्यमंत्री की ओर से विधायकों को भुगतान किया गया है। जब येदियुरप्पा सत्ता में थे तब उन्होंने यह राशि विभिन्न नेताओं, विधायकों और मंत्रियों से जुटायी थी।

शिवकुमार ने क्या कहा था
इन पन्नों को हासिल करने के संबंध में पूछे जाने पर शिवकुमार ने कहा था कि एक राजनेता होने के नाते वह दूसरे नेताओं और दल के बारे में जानकारी एकत्रित करते रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने स्रोत की जानकारी नहीं दी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि यह कब का लेनदेन है, वह नहीं जानते हैं और उनके पास इन पन्नों की मूल प्रति नहीं है।

आयकर ने लोकायुक्त को भी दी थी जानकारी
आयकर विभाग ने यह जानकारी कर्नाटक के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो या लोकायुक्त को भी दी थी। इस संबंध में आयकर विभाग ने येदियुरप्पा से भी पूछताछ की थी, तब उन्होंने कहा था कि उनकी डायरी लिखने की आदत नहीं है और इन पन्नों की हैंडराइटिंग उनकी नहीं है। उन्होंने इन पन्नों पर हस्ताक्षर किये जाने से भी इंकार किया था। उन्होंने अपने विरुद्ध राजनीतिक षडयंत्र किये जाने का भी आरोप लगाया था।

उन्होंने जांच के लिए अपनी हैंडराइटिंग का नमूना भी दिया था। बाद में आयकर विभाग ने इन पन्नों को हैंडराइटिंग मिलान के लिए हैदराबाद स्थित एक प्रयोगशाला में भेजा था जहां से इन पन्नों की मूल प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गयी थी। इन पन्नों को साक्ष्य के तौर पर पेश किये जाने के लिए हैंडराइटिंग मिलना जरूरी है और मूल प्रति के बगैर यह संभव नहीं है। 

 

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