Kundli Tv- इन तीन की पूजा के बिना अधूरा माना जाता है देवोत्थानी एकादशी व्रत

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इतना तो सब जानते ही हैं, एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष विधान होता है। तो ज़ाहिर है कि आज यानि 19 अक्टूबर देवोत्थानी एकादशी पर भी श्रीहरि का ही पूजन विशेष रहेगा। लेकिन क्या आप जानते हैं, इस दिन श्रीहरि के साथ-साथ किसका पूजन करना शुभ रहता है। अगर नहीं तो आइए हम आपको बताते हैं कि इस खास दिन इनके साथ-साथ किनका पूजन करना आपके लिए लाभदायक साबित हो सकता है। 


प्रबोधिनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी, देवउठनी एकादशी आदि के नाम से जानी जाने वाली इस एकादशी के दिन व्रत रखने से अनंत पुण्यफल की प्राप्ति होती है। 

देवों के सोने और जागने का अंतरंग संबंध आदि नारायण भगवान सूर्य वंदना से हैं, क्योंकि सृष्टि की सतत क्रियाशीलता सूर्य देव पर ही निर्भर है, सभी मनुष्य की दैनिक व्यवस्थाएं सूर्योदय से निर्धारित मानी जाती हैं। प्रकाश पुंज होने के नाते सूर्य देव को भगवान श्री विष्णु जी का ही स्वरूप माना गया है, इसलिए तो प्रकाश को ही परमेश्वर की संज्ञा दी गई हैं। इसलिए देवउठनी एकादशी पर विष्णु सूर्य के रूप में पूजे जाते हैं, जिसे प्रकाश और ज्ञान की पूजा कहा जाता है।

अनिवार्य होती है इनकी पूजा 
असल में विश्व स्वरूपा भगवान श्रीहरि के श्रीकृष्ण वाले विराट रूप की पूजा की जाती हैं। इस दिन विशेष रूप से श्री तुलसी, श्री विष्णु और श्री सूर्य नारायण की पूजा की जाती हैं। जो भी श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर विधि विधान से इन तीनों का पूजन करते है उनकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। पुराणों में सूर्योपासना का उल्लेख मिलता है और इस दिन बारह आदित्यों के नामों के जप करना भी बहुत शुभकारक होता है जो इस प्रकार हैं, इंद्र, धातृ, भग, त्वष्ट, मित्र, वरुण, अयर्मन, विवस्वत, सवितृ, पूलन, अंशुमत एवं विष्णु जी। इसके साथ ही आपको बता दें कि देवउठनी एकादशी से तुलसी विवाह और तुलसी पूजन का भी विधान होता है। 
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