इस मंदिर में आना है तो जान हथेली पर लेकर आएं !

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अक्सर आप ने ऐसे मंदिरों को बारे में सुना होगा जहां जाने से लंबी आयु का वरदान मिलता है। इनके साथ लोगों की असीम आस्थाएं जुड़ी होती हैं लेकिन क्या कभी आपने किसी ऐसी मंदिर के बारे में सुना है, जहां जाने से जान जा सकती है। हम जानते हैं आपको ये जानकर शायद यकीन नहीं होगा। परंतु आप मानें या न मानें लेकिन ये सच है। भारत में एक ऐसा मंदिर है जहां माता रानी के भक्तों से जुड़ी एक मान्यता प्रचलित है। इस मान्यता के अनुसार देवी मां के इस मंदिर में किसी भी भक्त को रात रूकने की अनुमति है। कहा जाता है जो भी भक्त इस मंदिर में रूकता है उसे अगली सुबह देखने को नसीब नहीं होती।


तो आइए विस्तार से जानें इस मंदिर के बारे में-
हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश के सतना जिले के मैहर तहसील के पास त्रिकूट पर्वत पर स्थित को मैहर देवी मंदिर की। यहां के लोगों का मानना है कि अगर इस मंदिर में कोई व्यक्ति रात के समय रूकने की कोशिश करता है, तो वह अगली सुबह नहीं देख पाता है। बता दें कि सतना जिले के मैहर में स्थित यह मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। परिसर में माता शारदा की मुख्य रूप से पूजा होती है। इसके अलावा देवी काली, दुर्गा, श्री गौरी शंकर, शेष नाग, श्री काल भैरवी, भगवान, फूलमति माता, ब्रह्म देव, हनुमान जी और जलापा देवी की भी पूजा होती है। माता रानी के दर्शन पाने के लिए भक्तों को 1063 सीढ़ियों का सफ़र तय करना पड़ता है। लोक मान्यता है कि मैहर देवी मंदिर की मां शारदा से मांगी हर मुराद पूरी होती है।

यहां के लोगों का कहना है कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार आल्हा और ऊदल माता रानी के बहुत बड़े भक्त थे। कहा जाता है कि इन दोनों ने ही जंगलों के बीच शारदा देवी के मंदिर की खोज की थी। बाद में 12 सालों तक आल्हा ने इस मंदिर में तपस्या करके देवी मां को प्रसन्न करके उनसे अमरत्व का आशीर्वाद पाया था। यहां के लोग कहते है कि आज भी यहां हर दिन माता शारदा के दर्शन सबसे पहले आल्हा और उदल ही करते हैं।

चूंकि आल्हा मां को शारदा माई कहकर पुकारता था और यही कारण है कि यहां विराजमान मां को शारदा माई कहा जाता है। इसके अलावा इस मंदिर से जुड़ी एक मान्यता प्रचलित है जिसके अनुसार रात को 2 बजे से लेकर 5 बजे तक इस मंदिर में किसी का भी प्रवेश करना वर्जित है। कहा जाता है कि अगर कोई व्यक्ति इस समय मंदिर में प्रवेश करता है तो उसकी मृत्यु हो जाती है।

मंदिर के पीछे पहाड़ों के नीचे एक तालाब है स्थित है, जिससे 2 कि.मी दूर एक अखाड़ा मिलता है। इस अखाड़े के बारे में मान्यता है कि यहां आल्हा और उदल कुश्ती लड़ा करते थे।
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