वाहन LPG संगठन की मांग, पुराने पड़ चुके मंजूरी नियमों में हो बदलाव

 

नई दिल्लीःएनपीजी वाहन किट और ईंधन का कारोबार करने वाली कंपनियों के मंच इंडियन आटो एलपीजी कोलिशन (आईएसी) ने वाहनों को गैस ईंधन के इस्तेमाल में बदलने से संबंधित पुराने पड़ चुके नियमों को बदलने की जरूरत है। इससे वाहनों को आसानी से पर्यावरणनुकूल ईंधन के इस्तेमाल योग्य बनाया जा सकेगा। वाहन एलपीजी किट और उपकरण का कारोबार करने वाली कंपनियों के शीर्ष संगठन आईएसी ने सड़क परिवहन मंत्रालय से ‘टाइप’ मंजूरी से जुड़े नियमों में बदलाव करने को कहा है। इस संगठन में ईंधन आपूॢतकर्ता सरकारी कंपनियां भी शामिल हैं आईएसी ने मंगलवार को बयान में कहा कि ऐसे पुराने पड़ चुके नियम रेट्रो फिटमेंट बाजार के रास्ते में बड़ी अड़चन खड़ी कर रहे हैं।

वाहनों को गैस ईंधन में बदलने के बाजार के रास्ते में ये नियमन बाधक हैं और साथ ही इनसे महत्वाकांक्षी शहर गैस वितरण परियोजना को शुरू करने में भी दिक्कतें आ रही हैं। सरकार का लक्ष्य आगामी वर्षों में देश के ऊर्जा क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का हिस्सा दोगुना से अधिक कर 15 प्रतिशत करने का है। सरकार वाहनों में गैस ईंधन के इस्तेमाल को प्रोत्साहन दे रही है। शहर गैस परियोजनाएं कई शहरों और कस्बों में शुरू की गई हैं। आईएसी के महानिदेशक सुयश गुप्ता ने कहा कि मौजूदा नियमों की वजह से वाहनों को एलपीजी और सीएनजी में बदलने वाले दोनों उद्योग संघर्ष कर रहे हैं।

वाहनों के इस्तेमाल को बदलने वाले सेवाप्रदाताओं की कमी की वजह से देश में गैस ईंधन का इस्तेमाल तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में कंपनियों को वाहन किट के लिए टाइट-अप्रूवल (किटके रूप की मंजूरी) के लिए प्रत्येक तीन साल में नवीकरण कराना होता है जो बहुत खर्चीला है। कंपनियों के लिए मॉडलों की मंजूरी के साथ एलपीजी और सीएनजी श्रृंखला के लिए मंजूरी के नवीकरण की लागत हर बार करीब चार करोड़ रुपये बैठती है। उन्होंने कहा कि नियमों का अनुपालन खर्चीला होने के कारण बहुत सी कंपनियां कारोबार से बाहर हो रही है। उन्होंने टाइप अप्रूवल को इस कारोबार में बड़ी बाधा बताया है।

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