दिल्ली में 70 लाख लोगों की दांव पर जिंदगी

नई दिल्ली (नवोदय टाइम्स): रोटी, कपड़ा और मकान। यह तीन चीजें किसी भी व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताएं हैं। अन्य जरूरतों का इंतजाम तो किसी न किसी तरह हो जाता है, लेकिन आवास की व्यवस्था मुश्किल से होती है। बस इसी मुश्किल को आसान करने के लिए आमजन बिना जांचे परखे अवैध रूप से बनाई गई इमारतों में आशियाना बना लेते हैं। मतलब कम कीमत पर फ्लैट खरीद लेते हैं। जैसा कि ग्रेेटर नोएडा के शाहबेरी में हुआ। इसी तरह से दिल्ली में सालों से हो रहा है। यहां पर कई दशक से अवैध निर्माण हो रहा है और शायद ही कोई कोना बचा हो जहां इस तरह की गतिविधियां न चल रही हों।

निर्माण अवैध और कमजोर भी
जिस तरह का निर्माण शाहबेरी में ढहा, उसी तर्ज पर दिल्ली के इलाकों में अवैध निर्माण किया जाता है और किया जा रहा है। यहां पर चार-पांच मंजिल इमारतों में आठ-आठ, सोलह-सोलह और इससे भी अधिक संख्या में फ्लैट बनाए जा रहे हैं। इन इमारतों की नींव की मजबूती के लिए उस तरह से काम नहीं किया जाता, जिस तरह से किया जाना चाहिए। यदि नींव में पानी जमा हो जाए तो यहां की इमारतें भी ढह जाएंगी। इन इमारतों की संख्या लाखों में पहुंचती जा रही है। हर इलाके में अवैध निर्माण हो रहा है और हर तरफ शाहबेरी कहा जा सकता है।

प्रॉपर्टी डीलरों की भरमार हर तरफ
अवैध निर्माण कितने बड़े स्तर पर हो रहा है, इसका अंदाजा प्रॉपर्टी डीलरों की भरमार को देख कर ही लग जाता है। हर मोहल्ले और हर गली में प्रॉपर्टी डीलर जमे हुए हैं। दिल्ली के प्रॉपर्टी डीलर ज्यादातर वही फ्लैट बेचते हैं, जो अवैध रूप से बने होते हैं। इसके  लिए बाकायदा वह कमीशन भी लेते हैं। बिल्डर और खरीदार दोनों से ही कमीशन लिया जाता है। प्रॉपर्टी डीलरों का दफ्तर देखकर ही लग जाता है कि अवैध मकान बनाने और बेचने का धंधा बड़े स्तर पर चल रहा है। इन दफ्तरों में दो-तीन ग्राहक सामान्यत: बैठे ही रहते हैं। किसी-किसी डीलर के यहां तो भीड़ लगी रहती है। 

बिल्डरों के आलीशान दफ्तर
प्रॉपर्टी डीलर एक साथ कई बिल्डरों के फ्लैट बेचते हैं और एक बिल्डर कई जगहों पर निर्माण  चलाता रहता है। बिल्डर के दफ्तर भी एक से एक दिखाई देते हैं। इनके दफ्तरों में बाकायदा बिल्डिंग की अनुमानित फोटो और ग्राफिक्स को बड़े-बड़े डिस्प्ले बोर्ड और फ्लेक्स लगाकर खरीदारों को दिखाई जाती है। भले ही इन इमारतों का नक्शा नहीं पास होता है, लेकिन अंदाज किसी तरह से कम नहीं है। कुछ बिल्डर तो ऐसे हैं जो फुल फॢनश्ड फ्लैट बेचते हैं और इनकी कीमत एक-एक करोड़ तक भी होती है। अवैध होने के कारण इनकी खरीद फरोख्त पर कोई असर नहीं पड़ता। 

खरीदार जानता है, फिर भी खरीदता है
गौर करने वाली बात यह है कि दिल्ली में अवैध रूप से बनाए गए फ्लैट लोग यह जानते हुए भी खरीदते हैं कि इसका नक्शा पास नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उनका सस्ता होना है। जिस तरह और आकार का फ्लैट 30 लाख में मिल जाता है, उसी साइज का फ्लैट अगर डीडीए की कॉलोनी में खरीदा जाए या नक्शा पास सोसायटी में खरीदा जाए तो उसकी कीमत करीब 80 लाख से लेकर एक करोड़ या उससे भी अधिक कीमत में मिलता है। 

मेट्रो के आने के बाद से बढ़ा अवैध निर्माण
दिल्ली में अवैध निर्माण सालों क्या दशकों से चल रहा है। लेकिन,जब से मेट्रो चलने लगी और दिल्ली के मुख्य इलाके बाहर के इलाकों से जुड़ गए, इसके बाद अवैध निर्माण और भी तेजी से होने लगा। मसलन उत्तम नगर की तरफ के इलाकों में ब्लू लाइन के कारण तेजी से अवैध निर्माण हुए और यहां पर देखते-देखते कुछ सालों में सघन आबादी हो गई। 

मॉनिटरिंग कमेटी ने निगमों को पाया है दोषी
दिल्ली के तीनों उत्तरी, दक्षिणी और पूर्वी निगम की मुख्य रूप से जिम्मेदारी है कि वह अवैध निर्माण नहीं होने दे। लेकिन, निगम के स्तर से यह जिम्मेदारी निभाई नहीं जा सकी और उसका ही परिणाम है कि आज इतनी बड़ी संख्या में अवैध कॉलोनियां बस गई हैं। सुुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी ने भी एक रिपोर्ट में स्थानीय निकायों को दोषी पाया। कमेटी ने यह तक कह दिया कि अवैध निर्माण करने वालों के कहने पर निगम के जिम्मेदार अधिकारी काम करते हैं। 

रजिस्ट्री भी होती है अवैध फ्लैटों की और लोन भी मिलता है
बड़ी बात यह है कि अवैध रूप से बनाए गए फ्लैटों की रजिस्ट्री भी होती है। अवैध फ्लैट की रजिस्ट्री का स्टाम्प शुल्क जमा किया जाता है और विधिवत दस्तावेज तैयार होते हैं। इस तरह पक्का काम होता है, ऐसे में लोगों को इस बात से बहुत मतलब नहीं होता कि इमारत नक्शे से बनी है या नहीं। सौदा तब और पक्का हो जाता है जब अवैध रूप से बनाए गए फ्लैट पर लोन भी मिल जाता है। ऐसे में खरीदार को लगता है कि लोन मिल रहा है और रजिस्ट्री भी हो रही है तो फिर क्या दिक्कत। ऐसा सोचते हुए वह फ्लैट खुशी-खुशी खरीद लेता है। 

दिल्ली सरकार ने निगमों को महाभ्रष्ट कहा
दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने नगर निगमों को महाभ्रष्ट तक कह दिया है। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने निगमों को सबसे अधिक भ्रष्ट विभाग बताया है। इससे पहले कुछ सर्वे में भी यह बात सामने आई है कि नगर निगमों में बहुत अधिक भ्रष्टाचार है।

मकान गिरने के आंकड़े

  • 23 जून 2018- दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में बेसमेंट का एक हिस्सा गिरने से एक की मौत और 5 घायल
  • 7 मई 2018- नॉर्थ दिल्ली के गुजरावाला टाउन में एक निर्माणाधीन बैंक्वेट हॉल के ढहने से 7 लोग मलबे में दबे, बाद में बचा लिया गया
  • 2 जुलाई 2017- लक्ष्मी नगर में 4 मंजिला बिल्डिंग के गिरने से 4 लोग दबे
  • 6 मई 2017- वेस्ट दिल्ली के इंद्रपुरी में 5 मंजिला इमारत गिरी, 5 लोग दबे
  • 16 जनवरी 2017-पुरानी दिल्ली के चांदनी महल इलाके में सदियों पुरानी इमारत गिरने से बुजुर्ग दंपति की मौत
  • 29 अपै्रल 2016-चांदनी चौक इलाके में  तीन मंजिला इमारत गिरने से 2 की मौत
  • 18 जुलाई 2015- विष्णु गार्डन इलाके में 4 मंजिला इमारत ढहने से 9 साल की बच्ची समेत 5 की मौत 
  • 1 अगस्त 2014-हरिनगर में निर्माणाधीन बिल्डिंग के मलबे में दबकर 4 की मौत
  • 28 जून 2014-नॉर्थ दिल्ली में 4 मंजिला इमारत गिरने से 8 की मौत
  • सितम्बर 2011 -पुराने जामा मस्जिद इलाके में 7 लोगों की मौत और 19 घायल
  • 15 नवम्बर 2010- लक्ष्मी नगर के ललिता पार्क हादसे में 5 मंजिला इमारत गिरने से 71 लोगों की मौत
  • नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, 2010 से 2014 के बीच पूरे देश में 13,178 लोगों ने जान गवां दी है


 इन इलाकों में अवैध निर्माण की बाढ़

दक्षिणी दिल्ली 
संगम विहार, सरिता विहार, ओखला, जैतपुर, मदनगीर, छतरपुर, पश्चिमी दिल्ली: पालम, नारायणा, उत्तम नगर, नजफगढ़, नांगलोई 

उत्तरी दिल्ली
बुराड़ी, सराय रोहिल्ला, रूप नगर, चांदनी चौक, सब्जी मंडी, कोतवाली

पूर्वी दिल्ली 
सीलमपुर, लक्ष्मी नगर, शाहदरा, गांधी नगर, रोहतास नगर, दुर्गापुरी

 

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