बंदर के हमले में गई थी जान, निगम भरेगा पूरा मुआवजा

चंडीगढ़(बृजेन्द्र) :बिल्डिंग की छत से बंदर द्वारा स्लैब गिराने से सैक्टर-22 निवासी भूपिंद्र कौर के 17 वर्षीय बेटे अमरजीत सिंह की जान जाने के मामले में नगर निगम चंडीगढ़ 10 दिन में मुआवजा भरेगा। बीते मंगलवार को निगम की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि प्रशासनिक स्तर पर उन्होंने फैसला लिया है कि वही सारा मुआवजा भरेंगे। यह जवाब निगम ने मुख्य केस में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील में दिया, जिसमें कहा था कि मुआवजा फॉरैस्ट एंड वाइल्ड लाइफ डिपार्टमैंट यू.टी. से लिया जाए। 

इसके पीछे कहा गया था कि बंदर भगाने की जिम्मेदारी फॉरैस्ट डिपार्टमैंट की है। हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के तहत मंगलवार को निगम कमिश्नर हाईकोर्ट में पेश हुए। निगम के इस जवाब के साथ ही निगम की अपील का हाईकोर्ट ने निपटारा कर दिया। इससे पूर्व वर्ष 2015 में दायर मुख्य याचिका पर बीते 17 अप्रैल को हाईकोर्ट ने भूपिंद्र कौर के बेटे की मौत पर 13,59,864 रुपए का मुआवजा मंजूर किया था। जिसमें से 4 लाख मुआवजा मुख्य याचिका की सुनवाई के दौरान 2-2 लाख रुपए के अंतरिम मुआवजे के रूप में पहले ही दिया जा चुका है। 

तय समय में मुआवजा न मिलने पर अवमानना याचिका भी दायर की थी
अप्रैल में सुनाए हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद पीड़ित परिवार को मुआवजे की रकम न मिलने पर परिवार ने निगम कमिश्नर व अन्यों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी। इसकी भी मंगलवार को सुनवाई थी जिस पर 31 दिसम्बर के लिए सुनवाई टाल दी गई है।

सैक्टर-22 में घटी थी घटना
सैक्टर-22 में 31 मार्च, 2015 में संबंधित घटना घटी थी। अमरजीत सिंह पर बिल्डिंग के टॉप फ्लोर से बंदर ने स्लैब गिरा दी थी। वह सैक्टर-22 में एक कपड़े की दुकान में काम करता था। घटना वाले दिन 31 मार्च को वह दुकान के बाहर खड़ा हुआ था। गंभीर हालत में उसे पी.जी.आई. में भर्ती करवाया गया था जहां 4 अप्रैल को उसकी मौत हो गई थी। 

यह था पूर्व वाइल्ड लाइफ वार्डन का जवाब
यू.टी. के तत्कालीन चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरैस्ट एंड चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन संतोष कुमार ने शहर में बंदरों के आतंक पर मुख्य याचिका में अपने जवाब में कहा था कि लोग इन्हें धार्मिक विश्वास के चलते खाने को देते हैं। यदि फॉरैस्ट डिपार्टमैंट बंदरों को शहर से बाहर भी भेजने का अभियान चलाए तो इनके वापस आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। 

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