गिरते रुपये पर सरकार की सफाई, अपने आप स्थिर होगा, कोई घरेलू कारण नहीं

नई दिल्लीःअमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के नये निचले स्तर तक गिरने के बीच सरकार ने कहा है कि रुपया अपने आप ही स्थिर हो जायेगा। सरकार के मुताबिक रुपये में गिरावट के पीछे घरेलू कारक जिम्मेदार नहीं हैं। मंगलवार को कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरता हुआ 71.57 रुपये प्रति डालर तक पहुंच गया। रुपये के गिरने से आयात महंगा होगा जिससे महंगाई बढ़ेगी।

वित्त मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, ‘‘प्रारम्भिक तौर पर रुपये में गिरावट की वजह व्यापार युद्ध छिडऩे की आशंका और विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम बढऩा है। सरकार का इन घटनाक्रमों पर नियंत्रण नहीं है। इसलिये हम यही कर सकते हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह अपने आप ही स्थिर होगा क्योंकि इस गिरावट के पीछे कोई घरेलू कारक जिम्मेदार नहीं है।’’ बहरहाल, इस स्थिति में चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है, क्योंकि तेल आयात के लिये अधिक भुगतान करना होगा। देश को अपनी तेल जरूरतों को पूरा करने के लिये 81 प्रतिशत आयात करना पड़ता है।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीका ने पिछले सप्ताह कहा कि भारत का 3.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के तय लक्ष्य से आगे निकल जाने का जोखिम है। कच्चे तेल के ऊंचे दाम से अल्पकालिक तौर पर राजकोषीय दबाव बढ़ जायेगा। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटा 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। अप्रैल- जून तिमाही में राजकोषीय घाटा पूरे वर्ष के अनुमान का 68.7 प्रतिशत रहा है।

डेलायट इंडिया के प्रमुख अर्थशास्त्री और पार्टनर अनीष चक्रवर्ती ने कहा कि रुपये में गिरावट बाजार में उभरती परिस्थितियों के अनुरूप है। यह काफी कुछ डॉलर की मजबूती के कारण है। स्टेट बैंक समूह के मुख्य आॢथक सलाहकार सौम्या कांति घोष ने कहा है कि जून से रुपया 6.2 प्रतिशत गिर चुका है। रिजर्व बैंक ने जून में दरें बढ़ाना शुरू किया है। उन्होंने कहा, ‘‘रुपये की गिरावट हालांकि डॉलर की मजबूती के अनुरूप है लेकिन हमारा मानना है कि यह गिरावट आगे भी जारी रह सकती है और इसे पुष्ट करने के लिये कई कारण मौजूद हैं।’’

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