केंद्र सरकार ने एक झटके में पाक-चीन को लगाया 700 करोड़ रुपए का चूना

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पाकिस्तान व चीन को एक झटके में 700 करोड़ रुपए का चूना लगाया है अब भारत में पड़े लगभग 3000 करोड़ रुपए के शत्रु शेयरों (देश छोड़कर शत्रु देश में जा चुके लोग) पर सरकार की नजर है। 

बीते साल 700 करोड़ रुपए जुटाए
शत्रु शेयरों की बिक्री तथा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (सी.पी.एस.ई.) में पुनर्खरीद से सरकार ने इस वित्त वर्ष में 11,300 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जुटाई है। गौरतलब है कि गत दिनों वित्त मंत्री अरुण जेतली ने बताया था कि इससे सरकार को चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से 85,000 करोड़ रुपए जुटाने में मदद मिली है। यह किसी भी वित्त वर्ष में अब तक का विनिवेश का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नवम्बर 2018 में निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) को कंपनियों के शत्रु शेयर बेचने की मंजूरी दी थी। इसके बाद शत्रु शेयरों को बेचकर सरकार ने 700 करोड़ रुपए हासिल किए। वैसे लोग जो अब भारत के नागरिक नहीं हैं और चीन या पाकिस्तान चले गए हैं, इनकी संपत्तियों को शत्रु संपत्ति कहा जाता है।

सरकार ने शेयरों की पुनर्खरीद से 10,600 करोड़ रुपए से अधिक जुटाए 
इसके अलावा सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के शेयरों की पुनर्खरीद से 10,600 करोड़ रुपए से अधिक जुटाए हैं। वित्त वर्ष 2018-19 में सरकार ने लगातार दूसरे साल विनिवेश से लक्ष्य से अधिक राशि जुटाई। चालू वित्त वर्ष के लिए बजट में 80 हजार करोड़ रुपए के विनिवेश का लक्ष्य तय किया गया था।  इससे पहले वित्त वर्ष 2017-18 में सरकार ने 72,500 करोड़ रुपए के लक्ष्य की तुलना में विनिवेश से एक लाख करोड़ रुपए से अधिक जुटाए थे। चालू वित्त वर्ष में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ई.टी.एफ.) से सर्वाधिक 45,729 करोड़ रुपए जुटाए गए। इसके बाद सरकारी पावर फाइनैंस कॉर्पोरेशन में आर.ई.सी. द्वारा सरकार की 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने से सरकार को 14,500 करोड़ रुपए मिले। सरकार को 5 कंपनियों एम.एस.टी.सी., आर.आई.टी.ई.एस., इरकॉन, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स और मिधानी के आई.पी.ओ. से 1,929 करोड़ रुपए मिले। सरकार को कोल इंडिया की बिक्री पेशकश (ओ.एफ.एस.) से 5,218 करोड़ रुपए और एक्सिस बैंक में एस.यू.यू.टी.आई. की हिस्सेदारी बेचने से 5,379 करोड़ रुपए मिले। पुनर्खरीद में ओ.एन.जी.सी., आई.ओ.सी., कोल इंडिया, ऑयल इंडिया और एन.एल.सी. जैसी कंपनियां शामिल रहीं। 

क्या होती है शत्रु संपत्ति?
बंटवारे के दौरान देश छोड़ कर गए लोगों की संपत्ति सहित, 1962 के भारत-चीन युद्ध और 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद भारत सरकार ने इन देशों के नागरिकों की संपत्तियों को सीज कर लिया था। इन्हीं संपत्तियों को शत्रु संपत्ति कहा जाता है।

 

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