सावधान: कैमिकल से पके फल मानव जीवन के लिए घातक

जालंधर(शैली): गर्मी के मौसम में फलों का राजा कहलाए जाने वाले आम सहित पपीता भी अधिकतर मानव जीवन के लिए घातक कार्बाइड कैमिकल से पकाए जाते हैं। जब आप बाजार से आम व पपीता खरीदें तो पहले इस बात को लेकर जरूर आश्वस्त हो लें कि जो फल आप खरीद रहे हैं, उसे कहीं कार्बाइड से तो नहीं पकाया गया है। 

जरूरी नहीं कि कार्बाइड से पके फल पूरी तरह से पके ही हों। अधिकांश फल बाहर से तो पके नजर आते हैं, लेकिन भीतर से यह अधपके ही होते हैं। इसका पता फल को काटने से चल पाता है। कार्बाइड से पके आम देखने में भले ही आपको प्राकृतिक तौर पर पके आमों की तरह नजर आएं, लेकिन यह आपके स्वास्थ्य को गंभीर नुक्सान पहुंचाते हैं। इनके सेवन से त्वचा कैंसर, गले का कैंसर, मुंह का अल्सर, डायरिया, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, उ‘च रक्तचाप, स्मृति लोप जैसी समस्याएं हो सकती हैं। राज्य की मंडियों में यह आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा व विजय नगर से आ रहे हैं। फ्रूट मंडी के कारोबारियों का कहना है कि दक्षिण भारत से आम की आवक फरवरी में ही शुरू हो जाती है। जून माह के प्रथम सप्ताह से उत्तर प्रदेश से आम की आवक शुरू हो जाएगी। कारोबारी बताते हैं कि मंडी से रिटेल कारोबारी कच्चे आम लेकर जाते हैं। ज्यादा मुनाफे के लालच में वह जल्द से जल्द आम को बेचना चाहते हैं। इस कारण वे आम को पकाने में कार्बाइड का इस्तेमाल करते हैं।

फल को पकाने की अन्य तकनीक हानिकारक व महंगी हैं जबकि बाजार में कार्बाइड आसानी से मिल जाता है व सस्ता होता है। ऐसे में प्रतिबंध के बावजूद अधिकांश रिटेल कारोबारी कार्बाइड से पके आम बेचते हैं। आम के अलावा पपीता व केला भी कार्बाइड की मदद से पकाया जाता है। पेटियों में क‘चे आम को रखने के दौरान कार्बाइड के छोटे-छोटे टुकड़े डाले जाते हैं। इस दौरान इससे घातक गैस निकलती है। गोदामों के आसपास से गुजरने पर भी कुछ अजीब तरह की गैस का एहसास होगा। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि फलों की नमी सोखकर कार्बाइड एसिटीलीन नामक गैस बनाता है। बाद में यह गैस एसिटलडिहाइड नामक गैस के रूप में परिवर्तित हो जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए नुक्सानदायक है। इसके संपर्क में आकर 12 घंटे में फल पक जाता है। यह रसायनों का कमाल है कि फल 12 घंटे में पक जाता है। व्यापारी थोड़े से लोभ के लिए लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने में लगे हैं।आम और सेब जैसे फलों को समूचा खाने की जगह काटकर खाएं व जितना संभव हो, उपभोग से पहले फल को छील लें या अच्छी तरीके से धोएं।

पकने की प्राकृतिक प्रक्रिया 
फलों का पकना एक प्राकृतिक प्रक्रिया होती है, जिसमें फल ज्यादा मीठे, कम हरे, मुलायम और रसीले, सुस्वाद होते हैं। आमतौर पर यह प्रक्रिया पेड़ों की डाली पर ही होती है, लेकिन कारोबार करने के दौरान पके फलों को दूर तक भेजने में बहुत नुक्सान होता है, लिहाजा उनका भंडारण करके पकाया जाता है। भंडारण में भी प्राकृतिक तरीके से पकने की प्रक्रिया धीमी होती है। जल्द फल पकने की इस प्रक्रिया में एंजाइम टूटते हैं, साथ ही स्टार्च जैसे पॉलीसैचुराइड्स हाइड्रोलिसिस प्रक्रिया से गुजरते हैं। यह प्रक्रिया स्टार्च को फ्रैक्टोज, ग्लूकोज, सुक्रोज जैसे छोटे अणुओं में तोड़ देती है कैल्शियम कार्बाइड में घातक और खतरनाक रसायन आर्सेनिक व फास्फोरस हाइड्राइड होते हैं, जो इंसानों पर प्रतिकूल असर डालते हैं। इससे पके फल खाने से पेट खराब रहता है। आंतों की कार्यशैली गड़बड़ाती है।

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