दागी सांसदों पर SC का बड़ा फैसला, चार्जशीटेड नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक नहीं

नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने आज दागी नेताओं के चुनावी भविष्य पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि चार्जशीट के आधार पर जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव लड़ने से रोकने के लिए सिर्फ चार्जशीट ही काफी नहीं है। पांच जजों की पीठ चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति रोहिंगटन एफ नरीमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया। पिछले महीने अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर आज फैसला सुनाया गया।

दरसअल, मार्च 2016 में शीर्ष अदालत ने यह मामला संविधान पीठ को विचार के लिए भेजा था। याचिकाकर्ता ने गुहार लगाई है कि जिन लोगों के खिलाफ आरोप तय हो गए हों और उन मामलों में पांच साल या उससे ज्यादा सजा का प्रावधान हो, तो उन्हें चुनाव लडऩे से रोका जाए।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पूछा था कि क्या चुनाव आयोग ऐसी व्यवस्था कर सकता है कि जो लोग आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं, उनके बारे में ब्योरा सार्वजनिक किया जाए।

अटॉर्नी जनल के के वेणुगोपाल ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि जहां तक सजा से पहले ही चुनाव लडऩे पर प्रतिबंध का सवाल है, तो कोई भी आदमी तब तक निर्दोष है जब तक कि न्यायालय उसे सजा नहीं दे देता। संविधान का प्रावधान यही कहता है। इसके साथ ही नेताओं के बतौर वकील प्रैक्टिस करने के खिलाफ याचिका पर भी न्यायालय कल फैसला सुनाएगा। 

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