आखिरकार चंडीगढ़ प्रशासन ने माना सुखना वर्ष 1988 से वैटलैंड एरिया

चंडीगढ़ (रमेश हांडा): आखिर चंडीगढ़ प्रशासन ने माना कि सुखना वैटलैंड एरिया है, जिसकी नोटीफिकेशन वर्ष 1988 में कर दी गई थी। प्रशासन ने हाईकोर्ट की फटकार के बाद सोमवार को अपना जवाब एफीडैविट के रूप में दाखिल किया जिसमें मान ही लिया कि सुखना 30 वर्षों से वैटलैंड एरिया है। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर प्रशासन से पूछा था कि क्या सुखना वैटलैंड एरिया है या नहीं अगर है तो अभी तक नोटीफिकेशन जारी क्यों नहीं हुई। 

 

हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ की स्वच्छता रैंकिंग में गिरी साख पर भी ङ्क्षचता जताते हुए नगर निगम को भी आड़े हाथ लिया और पूछा है कि क्या कारण रहे कि चंडीगढ़ की रैंकिंग तीसरे नंबर से खिसक कर 20वें नंबर पर पहुंच गई। कोर्ट ने कहा कि यह बहुत शर्म की बात है, निगम यह बताए कि भविष्य में रैंकिंग सुधारने की क्या योजना है। 

 

स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपी
कोर्ट ने सुखना को वैटलैंड एरिया घोषित करने के लिए वैटलैंड अथॉरिटी को मीटिंग करने को कहा था और उक्त मीटिंग के मिनट्स भी कोर्ट में जमा करवाने को कहा था। 

 

कोर्ट ने अथॉरिटी को निर्देश दिए हैं कि वह प्रशासन को वैटलैंड संबंधी मीटिंग्स की जानकारी अगली सुनवाई के वक्त दें। अथॉरिटी से चर्चा के बाद सोमवार को प्रशासन ने उक्त सभी क्षेत्रों से जुड़ी स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंप दी है। 


 

कांसल एरिया में हो रहे निर्माणों की रिपोर्ट भी दी  
हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन, हरियाणा व पंजाब सरकार सहित कोर्ट मित्र को कांसल एरिया में स्टेटस-को के बावजूद हो रहे निर्माणों की स्थिति स्पष्ट करने और उक्त निर्माणों की सूची तैयार कर कोर्ट को देने को कहा था ताकि निर्माण करने वालो को अवमानना नोटिस भेजे जा सकें। 

 

कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा सकेतड़ी में बनाए जा रहे सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांट संबंधी जवाब भी मांगा है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार से कहा था कि उक्त काम के लिए स्टेटस को रुकावट नहीं बनना चाहिए। 

 

हरियाणा ने भी जवाब दाखिल कर दिया    
सोमवार को हरियाणा ने भी इस संबंध में जवाब दाखिल कर दिया कोर्ट मित्र ने पिछली सुनवाई के वक्त बताया था कि हाईकोर्ट ने सुखना कैचमैंट एरिया में किसी भी तरह के निर्माण करने या पुराने हुए निर्माणों को गिराने पर रोक लगा दी थी।  

 

जिसके बाद रात के अंधेरे में गैर-कानूनी तरीके से लोग निर्माण कार्य कर रहे है जिन्हें गिराने के वक्त कोर्ट द्वारा लगाया स्टेटस-को आड़े आ रहा है। कोर्ट स्टेटस-को लगाने के बाद हुए निर्माणों का ब्यौरा भी मंगवाया था। 

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