Kundli Tv- इस उम्र में छोड़ देना चाहिए इन दोनों का मोह, वरना...

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भारत के इतिहास में एेसे कई विद्वानों का जिक्र सुनने-पढ़ने को मिलता है, जिन्होंने अपनी काबलियत के दम पर अपना नाम इतिहास के पन्नों पर रचा। इन्हीं में से एक थे आचार्य चाणक्य जिन्होंने अपने ज्ञान और नीतियों के बल पर देश का नक्शा बदल दिया। जब भी ज्ञान की बात की जाती है तो सबसे पहले आचार्य चाणक्य का नाम आता है। इन्होंने अपने ज्ञान को अपने तक सीमित न रखकर लोगों की भलाई के लिए उसे एक पुस्तक का रूप दे दिया।

अपने ज्ञान और बुद्धि के दम पर चाणक्य ने चंद्रगुप्त जैसे एक साधारण व्यक्ति को देश का सबसे बड़ा राजा भी बनवाया था, जिनका नाम आज भी लिया जाता है। चंद्रगुप्त को राजा बनाकर भी ये स्वयं उनके मंत्री बने थे। तो आईए जानते हैं चाणक्य नीति के पहले अध्याय के छठे श्लोक के बारे में जिसमें उन्होंने स्त्री और पैसे के बारे में कुछ ख़ास बातें बताई हैं। 

चाणक्य ने इस श्लोक में बताया है कि जब बात ख़ुद की रक्षा की आती है तो किसे चुनना चाहिए पैसा या स्त्री। अपनी बात को चाणक्य ने एक श्लोक के माध्यम से बताया है।

श्लोक:
आपदार्थे धनं रक्षेच्छ्रीमतां कुत अापदः।
कदाचिच्चलते लक्ष्मीःसंचितोऽपिविनश्यति।।

अर्थात:

आचार्य चाणक्य ने बताया है कि पैसे की रक्षा करनी चाहिए यानि पैसे की बचत करना चाहिए। क्योंकि यही पैसा मुसीबत के समय इंसान की मदद करता है। लेकिन जब स्त्री और पैसे में से किसी एक को चुनने की बात आती है तो पैसा छोड़कर स्त्री को चुनना चाहिए। धर्म और संस्कारों के साथ स्त्री ही आपके परिवार की रक्षा करती है। हिंदू धर्म के शास्त्रों में किसी भी महिला के बिना किया हया कोई भी धर्म-कर्म का काम अधूरा माना जाता है और बिना स्त्री के गृहस्थ आश्रम भी पूरा नहीं हो पाता है। इसलिए कहा गया है कि जब बात आत्मा को बचाने की आए तो उस समय स्त्री और पैसा दोनों के मोह को छोड़ देना चाहिए। तब ख़ुद को अध्यात्म के दम पर परमात्मा से जोड़ लेना चाहिए।
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