ऑफ द रिकॉर्ड- दोहरा झटका : निदेशक और DOP के बिना CBI

नेशनल डेस्कः केंद्रीय सतर्कता आयोग (सी.वी.सी.) की आंतरिक लड़ाई के कारण सी.बी.आई. में नए अभियोजन निदेशक (डी.ओ.पी.) का चयन नहीं हो सका। डी.ओ.पी. ओ.पी. वर्मा को सेवानिवृत्त होना था और उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति की फाइल कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डी.ओ.पी.टी.) ने सितम्बर में ही भेज दी थी। डी.ओ.पी.टी. ने सी.बी.आई. निदेशक आलोक वर्मा तथा सरकार के विभिन्न कानूनी विभागों से सलाह-मशविरा करने के बाद विचारार्थ 4 नाम भेजे थे। उचित पुन: निरीक्षण के बाद नामों की सूची छोटी की गई और सी.वी.सी. को भेज दी गई। सी.बी.आई. में डी.ओ.पी. की नियुक्ति का अंतिम अधिकार सी.वी.सी. के पास है। सी.बी.आई. में समूची व्यवस्था में डी.ओ.पी. एक प्रमुख सदस्य हैं। निदेशक द्वारा सभी आरोप पत्र और कानूनी फाइलें दाखिल करने हेतु डी.ओ.पी. को भेजी जाती हैं।

सी.बी.आई. के निदेशक डी.ओ.पी. के बिना काम नहीं कर सकते लेकिन सी.वी.सी. के 3 सदस्यों के कोई फैसला न लेने के कारण डी.ओ.पी. का चयन नहीं हो सका। आपस में तीखे मतभेदों के कारण वे एक नाम पर सहमत नहीं हो पाए और अन्तत: इन नामों की फाइल वापस भेज दी गई। क्योंकि 4 प्रस्तावित नामों में से एक इस अवधि दौरान सेवानिवृत्त हो गए। अब केंद्र सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों से नए नाम मांगे हैं। पिछले वर्ष अक्तूबर में सी.बी.आई. में आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच संकट पैदा होने से पूर्व ये 4 नाम सी.वी.सी. को भेजे गए थे। केंद्र ने अब एक नई अधिसूचना जारी कर मंत्रालयों से नाम भेजने को कहा है ताकि सी.बी.आई. में डी.ओ.पी. के रिक्त स्थान की पूर्ति में तेजी लाई जा सके।

डी.ओ.पी. सी.बी.आई. निदेशक की देखभाल और नियंत्रण में कार्य करता है। एजैंसी द्वारा जांच किए गए सभी मामलों में वह अपनी कानूनी राय देता है। अधिकारियों का कहना है कि कार्मिक मंत्रालय ने अब सभी सरकारी विभागों के सचिवों को लिखा है कि वे पात्र और इच्छुक अधिकारियों के नाम भेजें जो संयुक्त सचिव के रैंक से कम न हों और विशेष पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र हों। कार्मिक विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर 25 जनवरी तक नामों की सूची मांगी है ताकि सी.बी.आई. में अभियोजन निदेशक के पद की पूर्ति की जा सके। अधिकारियों ने कहा कि यह पहली दफा है कि सी.बी.आई. अपने नियमित प्रमुख निदेशक और अभियोजन निदेशक के बिना काम कर रही है।

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