बुराड़ी केस में हुआ एक और नया खुलासा, 100 लोगों से पूछताछ करेगी पुलिस

नई दिल्ली: बुराड़ी स्थित एक घर में मिली 11 लाशों के मामले में नया खुलासा हुआ है। जिस ठेकेदार ने घर में 11 पाइप और 11 लोहे के ग्रिल लगवाए थे उसकी बेटी तांत्रिक निकली है। बताया जा रहा है कि 7 जुलाई को ललित इस तांत्रिक महिला से मिलने वाला था। लेकिन उससे पहले ही पूरे परिवार की मौत हो गई। यह तांत्रिक महिला गीता माता के नाम से मशहूर है,जबकि बुराड़ी एरिया में ही अपने पिता से दूर ससुराल में रहती है।
 


संत नगर की प्रॉपर्टी तो नहीं इसके पीछे मूल वजह?
क्राइम ब्रांच को जानकारी मिली है कि बुजुर्ग महिला नारायणी देवी के बड़े बेटे दिनेश ने ही वर्षों पूर्व संत नगर की उक्त प्रॉपर्टी खरीदी थी। घटना के बाद लोग कयास लगाने लगे थे कि प्रॉपटी विवाद की वजह से भी किसी बाहरी तत्व के जरिए सभी 11 लोगों की हत्या करवा दी गई हो। लिहाजा हर पहलुओं पर क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू कर दी थी। दिनेश के पिता भोपाल दास मूलरूप से राजस्थान के चित्तौडगढ़ स्थित रावत भाटा के रहने वाले थे। वर्षों पूर्व गांव वालों से उनका झगड़ा हो गया था। जिसके बाद वह दिल्ली आ गए थे। दिल्ली में किराए पर रहकर उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस में स्थित एक कॉलेज की कैंटीन में नौकरी की। उनके बेहतर स्वभाव व कामकाज से खुश होकर कैंटीन मालिक ने अपनी रिश्तेदार नारायणी देवी से उनकी शादी करवा दी थी। नारायणी देवी हरियाणा के टोहना की रहने वाली थीं। कुछ समय बाद भोपाल दास टोहना जाकर रहने लगे और वहीं पर जमीन खरीद खेतीबाड़ी में लग गए थे। वहीं पर दिनेश, भुवनेश व ललित समेत उनके सभी बच्चों का जन्म हुआ और पढ़ लिखकर बड़े हुए। घर की माली हालत ठीक नहीं होने के कारण दिनेश पैसा कमाने के उद्देश्य से कुछ समय के लिए विदेश चले गए थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने संत नगर में 140 गज की प्रापर्टी खरीदी थी। कुछ समय बाद उन्होंने वहां मकान बनवाया। वहां पहले तीनों भाई रहते थे। सभी की शादियां हो जाने के बाद दिनेश ने छोटे भाई भुवनेश व ललित के लिए घर के नीचे दो दुकानें खुलवा उन्हें व्यवसाय में सेट करने के बाद वह खुद परिवार के साथ चित्तौडगढ़़ जाकर रहने लगे।

100 लोगों से पूछताछ, 500 की सूची तैयार
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस परिवार के 11 सदस्यों से फोन पर बात करने वालों को बुलाकर पुलिस पूछताछ करेगी। पुलिस कॉल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। सीडीआर रिपोर्ट में पुलिस का फोकस अंतिम चार-पांच महीनों के कॉल रिकॉर्ड पर ज्यादा है। यह वह अवधि है, जिस दौरान पुलिस द्वारा उसके घर से जब्त किए गए दस्तावेज व नोट लिखे गये हैं। उस नोट में बड तपस्या  या बरगद के पेड़ की पूजा की विधि के बारे में लिखा हुआ है, जिसे शनिवार और रविवार की दरमियान रात को करने की बात लिखा हुआ है। इन रिकार्डो के आधार पर, 500 से ज्यादा लोगों की एक सूची तैयार की गई है और अलग-अलग टीम उन लोगों से पूछताछ करेगी। 

इस गली में लगता है डर
पड़ोस के एक व्यक्ति ने बताया कि भाटिया परिवार के घर के सामने से गुजरते हुए एक अजीब सा डर का एहसास होता है। अंधेरा होने के बाद लोग इस घर के आसपास जाने से बचते हैं। उन्होंने बताया कि घटना के बाद से बच्चों में ज्यादा दहशत है। इलाके के बच्चे अकेले छत पर जाने और शाम के वक्त घरों के बाहर निकलने से घबराते हैं। हालात ये हैं कि बच्चों ने घरों के बाहर खेलना बंद कर दिया है। भाटिया परिवार के घर के आसपास ज्यादातर इलाके के बुजुर्ग, मीडियाकर्मी या पुलिस की टीम ही दिखाई देती है।

मृतकों का दिमाग पढ़ेगी पुलिस 
पुलिस अधिकारियों के अनुसार एक बार मौके से मिलने सबूतों की पुष्टि हो जाए। सीसीटीवी फुटेज व रजिस्टर में लिखी बातों का पूरी तरह से मिलान हो जाए। इसके बाद क्लिनिकल जांच होगी। इसके तहत रजिस्टर में लिखी बातों को मनोचिकित्सकों से पढ़वाएंगे और उनकी राय लेंगे। परिवार के सभी 11 लोगों की मनोदशा का भी पता किया जाएगा। दरअसल पुलिस मृतकों का साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी कराने की तैयारी कर रही है, जिससे यह समझा जा सके कि वास्तव में सुसाइड से पहले उनके दिमाग में क्या चल रहा था।


तंत्र मंत्र से दूर था मृत परिवार : रिश्तेदार
परिवार के करीबी रिश्तेदार विशाखा चुंडावत ने बताया कि मृत परिवार में चुंडावत उपनाम का इस्तेमाल किया जाता है, न की भाटिया। मृतकों में केवल प्रतिभा व उनकी बेटी के नाम में भाटिया उपनाम लगाया जाता था। विशाखा ने तंत्र-मंत्र व अंधविश्वास में आकर परिवार के 11 लोगों द्वारा आत्महत्या किए जाने की बात को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे पूरे परिवार को काफी करीब से जानती हैं और कभी भी ऐसी कोई बात उनके सामने नहीं आई। उनके चाचा ललित चुंडावत की मानसिक स्थिति बिल्कुल सही थी और कभी भी ऐसे मामलों में उनके लिप्त होने की भनक तक नहीं आई। उनके ऊपर उनके पिता की आत्मा आती हो, ऐसी घटना कभी देखने को नहीं मिली।

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