सिरमौर के गिरीपार क्षेत्र में बिशु मेले की धूम, ठोडा नृत्य होता है मुख्य आकर्षण

पांवटा साहिब (रोबिन): गिरीपार क्षेत्र में इन दिनों बिशु मेले की धूम है। जिला सिरमौर के अलावा जिला शिमला व उत्तराखंड में भी इन दिनों बिशु मेलों का आयोजन किया जा रहा है। मेले में जहां ठोडा नृत्य मुख्य आकर्षण का केंद्र होता है, वहीं कुश्ती के आलावा लोकगीत, हारुल व मुजरा नाटी का भी आयोजन किया जाता है। बिशु मेला क्षेत्रीय लोगों की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है।

कुल देवता को बुरांस के फूल चढ़ाने के बाद शुरू होता है मेला

क्षेत्र में संक्रांति के दिन जिला शिमला, सिरमौर व उत्तराखंड में देवता शिरगुल महाराज तथा चूड़ेश्वर महाराज के मंदिर में खुशहाली, सुख-समृद्धि के लिए बुरांस के फूल चढ़ाए जाते हैं। सबसे पहले लोग गांव के साझा आंगन में एकत्रित होते हैं। सभी बुरांस के फूल लेकर आते हैं फिर ढोल-नगाड़ों के साथ देव महिमा का गुणगान शुरू होता है। इसके बाद मंदिर में कुल देवता को फूल अर्पित किए जाते हैं। पूजा-अर्चना के बाद से मेले का आयोजन शुरू होता है।

आपसी मिलन के प्रतीक हैं बिशु मेले

क्षेत्र में अलग-अलग दिन व अलग-अलग जगह बिशु मेलों का आयोजन पूरे माह चलता रहता है। मेले के दिन गांव में लोग एकत्रित होकर देवछड़ी को साक्षी मान कर आपसी भाईचारे में रहने का कुल देवता से आशीर्वाद लेते हैं। उसके बाद देवछड़ी को गाजे-बाजे के साथ मेला स्थल तक पहुंचाते हैं। इसके बाद लोकनाटी, हारुल का दौर शुरू होता है। पुराने जमाने में युवाओं व युवतियों के लिए रिश्ते मेलों के माध्यम से ढूंढे जाते थे। तब आपसी सम्पर्क के सूत्रधारक बिशु मेले ही हुआ करते थे।

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