आर-नेवल के खिलाफ दिवालिया तैयारी, एनसीएलटी जाएगा IDBI बैंक

नई दिल्लीः आईडीबीआई बैंक अगले कुछ दिनों में रिलायंस नेवल ऐंड इंजीनियरिंग (आरनेवल) के खिलाफ नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के अहमदाबाद पीठ में दिवालिया याचिका दायर करेगा। सूत्रों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक ने करीब 70 दबावग्रस्त बड़े कॉरपोरेट खातों के समाधान के लिए 180 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की थी जो 27 अगस्त को खत्म हो चुकी है।

एक वरिष्ठ बैंकिंग अधिकारी ने कहा कि आईडीबीआई बैंक ने आरनेवल के खिलाफ एनसीएलटी के अहमदाबाद पीठ में ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) के तहत दिवालिया याचिका दायर करने के लिए वकीलों को निर्देश दिया है। आरनेवल पर लेनदारों का करीब 90.37 अरब रुपए का बकाया है और इसमें अधिकतर हिस्सेदारी आईडीबीआई बैंक की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक  'बार-बार आग्रह करने के बावजूद रिलायंस नेवल (डिफेंस) ऐंड इंजीनियरिंग ने रेटिंग की समीक्षा के लिए जरूरी जानकारी मुहैया नहीं कराई और इसलिए उसकी रेटिंग की समीक्षा नहीं की गई।' कंपनी की रेटिंग को अप्रैल 2016 में ही वार्षिक समीक्षा की जानी थी। वित्त वर्ष 2017 के लिए कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी पर मूलधन और ब्याज भुगतान को मिलाकर कुल करीब 3.423 अरब रुपए का ऋण बकाया है।

रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के चेयरमैन अनिल अंबानी ने कहा कि उन्होंने आरनेवल के लिए एक समाधान योजना लेनदारों के समक्ष रखी थी और आगे उन्हें निर्णय लेना था। पिछले साल नवंबर में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आईएफसीआई ने ऋण अदा न करने के लिए आरनेवल की सहायक इकाई रिलायंस मरीन ऐंड ऑफशोर के खिलाफ एनसीएलटी के अहमदाबाद पीठ में दिवालिया याचिका दायर की थी। एनसीएलटी के अहमदाबाद पीठ ने उस मामले को 19 फरवरी को निपटा दिया था। मार्च 2015 में अनिल अंपनी के नेतृत्व वाली कंपनी रिलायंस डिफेंस ऐंड इंजीनियरिंग ने 21 अरब रुपए के सौदे के तहत पीपावाव शपियार्ड और पीपावाव डिफेंस ऐंड ऑफशोर का अधिग्रहण किया था। पीपावाव शिपयार्ड जहाज बनाने वाली कंपनी थी जिसका भारतीय नौसेना के लिए जंगी जहाज एवं अन्य जहाज बनाने का विशेष अनुबंध था। रिलायंस डिफेंस ऐंड इंजीनियरिंग ने 2017 में अपना नाम बदलकर आरनेवल कर लिया। 

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