जानें, क्यों हिल गया था हस्तिनापुर का साम्राज्य ?

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हिंदू धर्म में भगवान विष्णु ने बहुत अवतार लिए और उनके हर अवतार के साथ शेषनाग ने भी हमेशा अवतार लिया। जैसे भगवान राम के साथ लक्ष्मण के रूप में और कृष्ण के साथ बलराम के रूप में, उन्होंने हर रूप में भगवान का साथ कभी नहीं छोड़ा फिर चाहे कैसी भी परिस्थिति आई है। अगर हम बात करें उनके बलराम रूप की तो उन्होंने हर कार्य में भगवान कृष्ण का साथ दिया और हर कदम पर उनको प्रेरित भी किया। वहीं दूसरी ओर जितने श्रीकृष्ण शांत व चंचल थे, उतने ही बलराम जी का स्वाभाव क्रोध वाला था। उनके गुस्से को शांत करना एक बार खुद भगवान के लिए मुश्किल हो गया था। एक बार उनका क्रोध इतना बड़ गया था कि वे अपने हल से हस्तिनापुर की संपूर्ण धरती का नाश करने लगे थे। लेकिन ऐसा क्या हुआ जिसकी वजह से उन्होंने ऐसा करना चाहा ? चलिए जानते हैं इसके पीछे जुड़ी कथा के बार में-


भगवान कृष्ण की 8 पत्नियों में से एक जाम्बवती थीं और उनके पुत्र का नाम साम्ब था, जिसकी वजह से श्री कृष्ण के कुल का नाश हुआ था। एक पौराणिक कथा के अनुसार साम्ब को दुर्योधन और भानुमती की पुत्री लक्ष्मणा से प्रेम हो गया था। लेकिन कृष्ण और दुर्योधन के कुटुंब के बीच युद्ध होने की वजह से उनका विवाह होना संभंव नहीं था। तो इसलिए एक दिन साम्ब ने लक्ष्मणा से छुपकर प्रेम विवाह कर लिया और अपने साथ द्वारिका ले जाने लगा। लेकिन जब ये बात कौरवों को पता चली तो उन्होंने अपनी पूरी सेना के साथ मिलकर साम्ब को रोका और उसे बंदी बना लिया।  

कुछ समय बाद ये खबर भगवान कृष्ण और बलराम जी के पास पहुंची तो वे तुरंत हस्तिनापुर पहुंचकर कौरवों से निवेदनपूर्वक कहा कि साम्ब को मुक्त करके और लक्ष्मणा को उसके साथ विदा कर दें। लेकिन कौरवों ने बलराम जी की बात नहीं मानी। उनकी मनाही को सुनकर बलराम जी पहले से ज्यादा गुस्से में आ गए और उन्होंने अपना हल उठाकर पूरी हस्तिनापुर की धरती को खींचकर गंगा में डुबोने चल पड़े। यह देखकर कौरव भयभीत हो गए और बलराम जी को रूकने के लिए कहा व उनसे क्षमा मांगी। उसके बाद सबने मिलकर साम्ब को लक्ष्मणा के साथ विदा कर दिया। 

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