चिकित्सक, विशेषज्ञों का दावा- ''आयुष्मान भारत'' योजना जनता के धन को निजी हाथों में भेजने का माध्यम

नई दिल्लीः अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सकों समेत लोक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरकार की प्रमुख एवं महत्त्वकांक्षी स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत’ की सामथ्र्य पर बुधवार को सवाल उठाते हुए दावा किया कि यह जनता के धन को निजी क्षेत्र को भेजने का "आधिकारिक माध्यम’’ है। पूर्व में ऐसी स्वास्थ्य लाभ योजनाओं के कार्यान्वयन का उल्लेख करते हुए विशेषज्ञों ने विश्वस्तरीय स्वास्थ्य योजना का लाभ पहुंचाने के लिए तत्काल सरकारी अस्पतालों की स्थिति को दृढ़ करने पर जोर दिया।


देश के प्रतिष्ठित चिकित्सीय संस्थान के परिसर में ‘आयुष्मान भारत : तथ्य एवं कल्पना’ पर पैनल चर्चा के दौरान ये बातें कही गईं। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सोशल मेडिसिन एंड कम्युनिटी हेल्थ के प्रोफेसर डॉ विकास वाजपयी ने कहा कि आयुष्मान भारत और कुछ नहीं बल्कि नई बोतल में पुरानी शराब है। वहीं एम्स में बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्रमुख सुब्रतो सिन्हा ने कहा कि आयुष्मान भारत बाह्य रोगी विभाग की उपचार संबंधी सुविधाएं नहीं उपलब्ध कराता जो स्वास्थ्य व्यय का बड़ा घटक है और यह भर्ती किए जाने वाले रोगियों के उपचार से ज्यादा महंगा है। 

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