ऑफ द रिकॉर्डः अटल का JNU में प्रवेश!

नेशनल डेस्कः जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तो वह चाहते थे कि उनकी पार्टी भाजपा वामदल नियंत्रित जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जे.एन.यू.) में प्रवेश करे। उनको इस बात में कोई सफलता नहीं मिली और संघ परिवार वामदलों के गढ़ को भेदने में विफल रहा मगर उनका स्वप्र एच.आर.डी. मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पिछले सप्ताह बिना किसी विवाद या गड़बड़ी के पूरा कर दिया। पिछले दिनों वाजपेयी का निधन हुआ था। जावड़ेकर ने भारी संख्या में लोगों से मुलाकात की और उनको इस बात के लिए राजी किया कि सरकार जे.एन.यू. को विश्व स्तर की संस्था बनाने के लिए काफी आगे जाने की इच्छुक है।
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सरकार स्कूल ऑफ मैनेजमैंट एंड इंजीनियरिंग सहित कुछ नए कोर्स शुरू करने की इच्छुक है। जे.एन.यू. की कार्यकारी परिषद इस बात पर राजी हुई कि इन कोर्सों के शुरू होने से जे.एन.यू. का स्तर काफी बढ़ जाएगा। इसी बीच यह दलील दी गई कि मैनेजमैंट सैंटर का नाम स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर हो। विभिन्न स्तरों पर इस मुद्दे पर लम्बी चर्चा हुई क्योंकि जावड़ेकर किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते थे। वह चाहते थे कि यह मामला बातचीत के जरिए सुलझाया जाए।
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आखिर में नतीजा यह निकला कि कार्यकारी परिषद द्वारा वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी गई और ‘अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ मैनेजमैंट एंड एंटरप्रन्योरशिप’ के रूप में नाम का प्रस्ताव रखा गया। कुछ लोगों ने महसूस किया कि इससे जे.एन.यू. के अनुसंधान की प्रवृत्ति में कमी आएगी मगर अंतत: अटल ने जे.एन.यू. में प्रवेश कर ही लिया।

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