Kundli Tv- क्या आप भी हैं इस दौलत के मालिक

ये नहीं देखा तो क्या देखा (देखें VIDEO)
एक महात्मा ने देखा कि उनके शिष्य को अपने ज्ञान और विद्वता पर बड़ा घमंड होने लगा है। महात्मा उसके इस घमंड को दूर करना चाहते थे। उन्हें शिष्य को सच्चा ज्ञान देने की सूझी, जिसके चलते एक दिन सुबह ही वह उसे साथ लेकर यात्रा पर निकले।


दोपहर के समय वे दोनों एक खेत में पहुंचे, जहां एक किसान अपनी फसल को सींच रहा था। गुरु और शिष्य काफी देर तक वहां खड़े रहे लेकिन किसान ने आंख उठाकर उनकी ओर देखा तक नहीं। वह लगन से अपने कार्य में लगा रहा।

दोपहर ढले महात्मा अपने शिष्य के साथ एक नगर में पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि एक लुहार लोहा पीट रहा है। पसीने से उसकी सारी देह तर-बतर हो रही थी। गुरु-शिष्य काफी देर वहां खड़े रहे लेकिन लुहार को भी गर्दन ऊपर उठाने की फुर्सत नहीं थी लिहाज़ा वह भी अपने काम पर लगा रहा।

गुरु-शिष्य फिर आगे बढ़े और दिन छिपने के समय वे एक सराय में पहुंचे। दोनों ही बेहद थके हुए थे। वहां भी उन्हें 3 मुसाफिर मिले जो बहुत थके हुए लग रहे थे। उन्हें देखकर प्रतीत हो रहा था कि तीनों ही अपने-अपने काम से लौटे हैं और काफी थकान में हैं। गुरु ने शिष्य से कहा कि तुमने देखा, पाने के लिए कितना देना पड़ता है। किसान तन-मन लुटाता है, तब कहीं खेत फलता है और लोगों को खाने को मिलता है। लुहार शरीर सुखा देता है तब धातु सिद्ध होती है, यात्री अपने को थकाकर ही मंजिल पाता है।

वे शिष्य से बोले कि तुमने ज्ञान के पोथे रट डाले लेकिन सच्चा ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाए, ज्ञान तो कमाई है। अपने को झोंककर उसे प्राप्त किया जाता है। महात्मा ने कहा कि वत्स कर्मों से ज्ञान की क्यारियां सींचो, जीवन की आग में ज्ञान की धातु सिद्ध करो और मार्ग में अपने को झोंककर ज्ञान की मंजिल पाओ। ज्ञान किसी का सगा नहीं है। जो उसे कमाता है, वह उसी के पास जाता है।
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