'तुम्हें कुर्सी पर बैठने का सलीका नहीं' सुन आहत हुए लिपिक, अपनाएं बगावती सुर

मेरठः कई बार धैर्य के अभाव के कारण छोटी सी बात भी बड़े विवाद का रूप ले लेती है। ऐसा ही एक मामला मेरठ में सामने आया है। जहां जिला कृषि अधिकारी ने अपने अधीनस्थ प्रधान लिपिक को सिर्फ यह कहा था कि तुम्हें कुर्सी पर बैठने का सलीका नहीं आता। लेकिन जिला कृषि अधिकारी को शायद यह नहीं पता था कि उनकी यह बात प्रधान लिपिक के दिल-दिमाग में घर कर लेगी और वह बगावत पर उतर आएंगे।

मेरठ कचहरी स्थित जिला कृषि कार्यालय में राजेश कुमार प्रधान लिपिक के रूप में कार्यरत हैं। यहां के जिला कृषि अधिकारी प्रमोद साहनी है। राजेश कुमार के मुताबिक वह अॉफिस में कुर्सी पर बैठे हुए थे तभी जिला कृषि अधिकारी उनके चेंबर में पहुंच गए। उन्होंने कहा कि तुम कुर्सी पर बैठना नहीं जानते। तुम्हें कुर्सी पर बैठने का सलीका नहीं है। यह सब उन्होंने तमाम स्टाफ के सामने कहा, जिससे राजेश को शर्मिंदगी महसूस हुई। कई बार तो स्टाफ के लोगों ने इस बात को लेकर राजेश को टोका भी। यह बात उनके दिल-दिमाग में घर कर गई। जिसके चलते राजेश अधिकारी के खिलाफ बगावत पर उतरते हुए गांधीवादी नीति पर आ गए। 

उन्होंने ऑफिस में रखी हुई आरामदायक कुर्सी और टेबल छोड़ फर्श पर चटाई बिछाकर बैठ गए। इतना ही नहीं ऑफिस में रखे कंप्यूटर को बंद करके डायरी पेन से अपना काम करने लगे। जब कोई प्रधान लिपिक से मिलने उनके चेंबर में आता है तो वह पहले चप्पल जूता बाहर उतारता है उसके बाद नीचे फर्श पर बैठकर अपनी समस्या रखता है और उनसे बात करता।

राजेश कुमार का कहना है कि उनकी रिटायरमेंट में मात्र साढ़े 6 साल बचे हैं और अब अपनी बची हुई शेष नौकरी वह इसी चटाई पर बैठकर करेंगे। वहीं जब इस बारे में कृषि जिलाधिकारी प्रमोद साहनी से बात करनी चाही तो वह अपने ऑफिस में नहीं मिले। 

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