सदा याद रहेंगी भारत रत्न ''अटल'' की ये खास बातें

शिमला/सोलन (कुलदीप/पाल):मनाली मत जइयो गोरी, राजा के राज में। जैसी कविताओं की रचना करने वाले भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (93) के आकस्मिक निधन से पूरे देश के साथ हिमाचल प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश को सदैव अपना दूसरा घर माना और प्रीणी में अपने लिए घर भी बनाया। वाजपेयी के आगमन पर 3 बार मनाली में कविता सम्मेलन का आयोजन हुआ। उन्होंने 6 जून, 2002 को हुए सम्मेलन में ऊंचाई, ओह की बूंद और मौत से ठन गई आदि कविताओं का पाठ किया। ऐसा नहीं है कि वाजपेयी को मनाली ही प्रिय था, उनको तो पूरे हिमाचल प्रदेश और यहां के प्राकृतिक सौंदर्य से प्रेम था। 
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इसी कारण जब वे देश के प्रधानमंत्री बने तो हिमाचल प्रदेश में विरोधी दल कांग्रेस की सरकार रहते हुए विशेष औद्योगिक पैकेज दिया गया। हिमाचल में औद्योगिक क्रांति का श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी को ही जाता है। देश के प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने वर्ष 2002 में हिमाचल को औद्योगिक पैकेज की घोषणा सोलन के हरठ से की थी। प्रदेश को औद्योगिक पैकेज मिलने के बाद यहां पर औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिला था। इस पैकेज का ही कमाल है कि छोटा सा राज्य हिमाचल अब पूरे विश्व में फार्मा हब के रूप में विकसित हो गया है। 

जब अटल ने जयराम को कहा भावी मुख्यमंत्री
एक समय ऐसा भी आया, जब अटल बिहारी वाजपेयी संभवत: वर्ष 2004 में मनाली आए थे। जब वे जाने लगे तो तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल से मिलने के बाद मजाकिया लहजे में कहा, ठीक है वर्तमान मुख्यमंत्री भी मिल लिए और भावी भी आ गए। मजाकिया लहजे में कही उनकी यह बात सत्य साबित हुई और जयराम ठाकुर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन गए।
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ऊंचे पहाड़ पर जमती है सिर्फ कफन की तरह सफेद और मौत की तरह ठंडी बर्फ
ऊंचे पहाड़ पर
पेड़ नहीं लगते,
पौधे नहीं उगते,
न घास ही जमती है।
जमती है सिर्फ बर्फ, 
जो कफन की तरह सफेद और
मौत की तरह ठंडी होती है।।
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविता की ये पंक्तियां जीवंत हैं और सदा के लिए जीवंत रहेंगी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अक्सर मनाली के प्रीणी गांव स्थित अपने घर आते रहते थे। इस गांव में अपने घर के आंगन में बैठकर उन्होंने कई कविताएं लिखीं। यहां की पहाड़ियों, वादियों, घने जंगलों व दिल्ली से भुंतर तक की हवाई यात्रा सहित कई बातों को उन्होंने अपनी कविताओं में उकेरा है। अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की सूचना मिलते ही उनके प्रीणी गांव में भी मातम छा गया है। प्रधानमंत्री रहते हुए भी अटल बिहारी वाजपेयी कई बार मनाली के प्रीणी गांव में आए और कई दिनों तक यहीं रहे। यहीं से पूरी सरकार चलती रही। रोहतांग टनल का नींव पत्थर अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री रहते हुए मनाली के बाहंग में रखा था।

रोहतांग टनल को बनाने की घोषणा अटल बिहारी वाजपेयी ने लाहौल दौरे के दौरान की थी। उसके बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए इसका शिलान्यास किया और अब यह टनल बनकर लगभग तैयार है। इसी साल के अंत में या आगामी वर्ष के शुरूआती दौर में इस टनल का लोकार्पण किया जा सकता है। मनाली में अटल बिहारी वाजपेयी अक्सर गांव के लोगों के बीच बैठते थे और उनसे बतियाते हुए कई योजनाओं पर चर्चा करते थे। प्रीणी स्कूल में कार्यक्रम के आयोजन के दौरान स्कूल को उन्होंने कई सौगातें दीं। स्कूल परिसर में अटल जी द्वारा लगाए गए देवदार के पेड़ आज भी हरे-भरे हैं। अटल जी जब भी प्रीणी आते थे तो उनके लिए गांव की ओर से कुल्लवी धाम परोसी जाती थी।

मंडी में बोले थे वाजपेयी-भाषण मेरा सुनने आते हो और वोट कांग्रेस को देते हो
मंडी के साथ वाजपेयी जी का विशेष लगाव रहा है। यहां की गलियों, चौराहों, दुकानों और कुछ लोगों के घरों में उनके कदम पड़े हैं। वाजपेयी जी बार-बार मंडी आते खासकर लोकसभा चुनावों के दौरान वह मंडीवासियों के पसंदीदा वक्ता होते। उनकी जनसभाओं में काफी भीड़ उमड़ती मगर हर बार मंडी संसदीय क्षेत्र से भाजपा का उम्मीदवार हार जाता। एक बार मंडी की चुनावी सभा में भीड़ को देखकर वाजपेयी जी ने कहा कि आप लोग भाषण मेरा सुनने आते हो और वोट जाकर कांग्रेस को देते हो। जितनी भीड़ यहां है अगर सभी भाजपा को वोट दे दें तो हमारा उम्मीदवार जीत जाए। हेमंतराज वैद्य बताते हैं कि वाजपेयी जी के साथ वह 1990 के विस चुनाव से पूर्व होटल राजमहल में बैठे थे। वाजपेयी जी ने पूछा कि अब के चुनाव का हाल क्या है तो इस पर वैद्य जी ने कहा अबकी बार हम जीत जाएंगे। तब वाजपेयी जी ने कहा कि तुम मंडी वाले भाषण मेरा सुनते हो और वोट नहीं देते। जनसंघ के नेता के तौर पर वाजपेयी जी लगातार मंडी आते रहे हैं। इस दौरान मंडी के संघ परिवार से जुड़े लाला दलीप चंद वैद्य उनके परम मित्र रहे हैं। उनकी इस दोस्ती के चलते बतौर नेता प्रतिपक्ष 2 बार उनके घर में आकर वाजपेयी जी ने भोजन ग्रहण किया है। 
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गांव के लोग उनके लिए लाते थे सब्जियां और स्थानीय पकवान 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का शिमला और हिमाचल प्रदेश से नाता वर्ष 1967 से लगातार रहा है। वर्ष 1967 में शिमला में जनसंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेने अटल के साथ तत्कालीन जनसंघ के वरिष्ठ नेता यहां पहुंचे थे। उनको पाकिस्तान के साथ हुए शिमला समझौते के समय भी शिमला बुलाया गया था। वह राजभवन तो नहीं गए, मगर जैन धर्मशाला में उनकी बैठक पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल के साथ जरूर हुई। आपातकाल के बाद भी मोरारजी देसाई की सरकार के वक्त अटल शिमला आए। भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 1968 में पहली बार मनाली आए थे। वाजपेयी मनाली की वादियों से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने मनाली को ही अपना दूसरा घर बना लिया। जीवनभर राजनीति में सक्रिय रहने वाले अटल ने 1990 में मनाली के अलेऊ में जमीन खरीदी और 1992 में अपना आशियाना बनाया।

1992 के बाद उनका मनाली आना-जाना लगा रहा। उन्होंने मनाली को न केवल अपना दूसरा घर माना बल्कि प्रधानमंत्री बनने पर एक सप्ताह तक मनाली से ही देश का संचालन किया। मनाली के प्रीणी वासियों ने उन्हें सदा के लिए मुखिया की उपाधि दी। ग्रामीणों के वे प्रिय चाचू बन गए। अटल जी जब भी मनाली रहने आते थे तो ग्रामीण उन्हें सब्जियां और स्थानीय पकवान पहुंचाते थे। प्रधानमंत्री रहते हुए लाहौली दोस्त से मिलने अटल जी लाहौल जा पहुंचे थे। लाहौल घाटी के केलांग में रैली को संबोधित करने के बाद अटल ने अपने बचपन के दोस्त अर्जुन गोपाल टशी दवा संग समय बिताया। अर्जुन गोपाल जी का जब निधन हो गया तो अटल जी ने अपने दोस्त के बेटे संग फोन पर शोक प्रकट किया था।अटल बिहारी वाजपेयी ने 2002 में रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नाडीस के साथ रोहतांग सुरंग के साऊथ पोर्टल की सड़क का शिलान्यास किया।

जब वाजपेयी के भाषण के बाद परमार की सभा में बरसे टमाटर
यह भी चुनावी दौर की बात है जब डा. परमार प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। एक ही दिन दोनों दलों कांग्रेस और जनसंघ की रैलियां मंडी में थीं। कांग्रेस की रैली चौहटा बाजार में थी। ठीक उससे पहले वाजपेयी जी की रैली सेरी मंच पर थी, जहां भारी भीड़ मौजूद थी। वाजपेयी की रैली समाप्त होने के बाद यह भीड़ जब चौहटा में आई तो डा. परमार और अन्य कांग्रेसी नेताओं पर टमाटर बरसाए गए। पार्वती परियोजना के शिलान्यास के दौरान सन 2000 में उन्होंने स्थानीय पत्रकारों से बात भी की थी। 

यादों में अटल
अटल जी ने धूमल को कहा-अच्छा हुआ मैं प्रचार करने नहीं आया
पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि अटल जी हमेशा उनके मार्गदर्शक रहे हैं तथा जो भी उनसे मांगा कभी उसके लिए इंकार नहीं किया। धूमल ने अपनी स्मृतियां सांझा करते हुए बताया कि जब 1991 में आम चुनावों में आदरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने चुनाव प्रचार के लिए आना था तो 4 जनसभाएं करनी थी लेकिन उनका हवाई जहाज कांगड़ा में लैंड नहीं हुआ जिसके चलते कांगड़ा और हमीरपुर की जनसभाएं रद्द हो गईं और मंडी व सरकाघाट में अटल जी ने 2 जनसभाएं की लेकिन चुनाव नतीजों के बाद जब अटल जी मनाली आए तो मैं उनसे मिलने मनाली पहुंच गया। उस समय अटल जी वन विभाग के विश्रामगृह में रुके हुए थे। उस समय अटल जी ने काली पैंट पहनी हुई थी और हाथ में कुत्ते का एक संगल पकड़ा हुआ था। श्री धूमल ने बताया कि उसी दौरान अटल जी की बेटी मिठाई लेकर आ गई और मुझे मिठाई देने लगी लेकिन मैंने इंकार कर दिया और अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि मैं अटल जी की मिठाई नहीं खाऊंगा क्योंकि अटल जी चुनाव प्रचार के दौरान मेरे संसदीय क्षेत्र में जनसभा करने नहीं आए। इस पर अटल जी ने मुस्कराते हुए कहा कि अच्छा हुआ मैं आपके चुनाव प्रचार में नहीं पहुंचा क्योंकि जहां मैं चुनाव प्रचार में गया था वहां पर प्रत्याशी हार गए। इसलिए आप मिठाई का एक पीस नहीं बल्कि 2 पीस खाओ। 

जब खीज गए थे और 400 करोड़ का पैकेज 200 करोड़ कर दिया
एक और स्मृति सांझा करते पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने बताया कि जब 9 दिसम्बर, 1999 को अटल जी देश के प्रधानमंत्री थे और मैं प्रदेश का मुख्यमंत्री तथा तो उस समय अटल जी एशिया के सबसे बड़े हाईड्रोलिक प्रोजैक्ट का उद्घाटन करने कुल्लू आए थे। मैं उन्हें लेने चंडीगढ़ चला गया था उसी दौरान मैने अटल जी से प्रदेश की खराब वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए 400 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज की मांग की थी जिसे अटल जी ने मान भी लिया था और मैंने कहा था कि जनसभा में मैं आप से कुछ नहीं मांगूंगा। इसके बाद जनसभा में एक नेता ने 400 करोड़ रुपए के पैकेज की मांग कर डाली, जिससे अटल जी खिज गए और उन्होंने 200 करोड़ रुपए देने की घोषणा कर दी। इसके बाद मैं और अटल जी ने टैंट में बैठकर खाना खाया। इसी दौरान जब मैं और अटल जी खाना खाने के बाद सूप पी रहे थे तो मैंने कहा कि आपने 400 करोड़ रुपए देने की बात कही थी लेकिन किसी एक की गलती का खमियाजा पूरे प्रदेश की जनता को नहीं मिलना चाहिए। जिस पर अटल जी भावुक हो गए और उन्होंने उसी दौरान मीडिया को बुलाया और उनके सामने घोषणा की कि मैं भूल गया था मैंने हिमाचल को 200 नहीं 400 करोड़ रुपए का पैकेज दिया है। 

स्कूल की लाइब्रेरी के लिए भेजते थे पुस्तकें
ग्रामीण लोत राम, देवी राम, गोपाल नेगी, तुले राम व बुध राम कहते हैं कि अटल जी जब प्रधानमंत्री नहीं थे, तब भी वे प्रीणी आते थे और उनसे जरूर मिलते थे। पूर्व पंचायत प्रधान कुंदन लाल ने बताया कि उनके प्रधान रहते हुए अटल जी प्रीणी आए थे लेकिन तब अटल जी प्रधानमंत्री नहीं थे। उन्होंने बताया कि अटल जी को 5 जून, 2006 को उन्होंने स्पेयर पार्ट्स से तैयार की गई एक घड़ी उपहार में दी थी। अटल जी कई वर्षों तक स्कूल की लाइब्रेरी के लिए पुस्तकें आदि भेजते रहे। जबसे उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहा तब भी पुस्तकें आती रहीं। अटल जी की यादें इस गांव में कई तरह की चीजों के रूप में मौजूद हैं। पंचायत प्रधान शिवदयाल बताते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी जैसी शख्सियत उनके पड़ोसी हैं, इस बात का हर ग्रामीण को गर्व है। उन्होंने कहा कि हालांकि बीमार होने के चलते 2006 के बाद अटल जी मनाली नहीं आए लेकिन प्रीणी वासी तब से 25 दिसम्बर को उनके जन्मदिवस उत्सव के रूप में मनाते हैं। उन्होंने कहा कि अटल जी की कमी हमेशा प्रीणी के ग्रामीणों को खलती रहेगी।

जब वाजपेयी के भाषण के बाद परमार की सभा में बरसे टमाटर
यह भी चुनावी दौर की बात है जब डा. परमार प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। एक ही दिन दोनों दलों कांग्रेस और जनसंघ की रैलियां मंडी में थीं। कांग्रेस की रैली चौहटा बाजार में थी। ठीक उससे पहले वाजपेयी जी की रैली सेरी मंच पर थी, जहां भारी भीड़ मौजूद थी। वाजपेयी की रैली समाप्त होने के बाद यह भीड़ जब चौहटा में आई तो डा. परमार और अन्य कांग्रेसी नेताओं पर टमाटर बरसाए गए। पार्वती परियोजना के शिलान्यास के दौरान सन् 2000 में उन्होंने स्थानीय पत्रकारों से बात भी की थी। 

आज भी याद है वह वाकया
वर्ष 1996 की बात है। मैंने बचपन से अखबार बेचने का काम किया है और इसीलिए ताजा खबरों पर त्वरित पाठकीय प्रतिक्रियाओं का संग्राहक बन गया था। एक सुबह एक व्यक्ति दौड़ता हुआ मेरे पास आया और कहा- आज का अखबार देना। मैंने अखबार निकाला। उसने 5 रुपए का सिक्का दिया। मैंने कहा, अखबार 2 रुपए का है। उसने लगभग खिलखिलाकर कहा- कोई बात नहीं, 5 रुपए ही रख लो। फिर उसने अखबार के मुखपृष्ठ को खोलकर अगाध संतोष के साथ उसको निहारा और उसके शीर्षक को धीरे-धीरे पढ़ा- अटल जी प्रधानमंत्री बनेंगे। पहला अटल मंत्रिमंडल कल शपथ लेगा। उस अपरिमित संतोष को मैं आज तक भुला नहीं पाया, जो उसके मुख पर मुझे उस सुबह दिखाई दिया था। अटल जी के प्रधानमंत्री बनने के समाचार भर से उभर आने वाला संतोष।      

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